एक तरफ शहरी एरिया में 18+ वैक्सिनेशन के लिए सुबह 5 बजे से टीका लगवाने वालों की लाइन लग रही है तो दूसरी ओर गरियाबंद के देवभोग ब्लॉक का धुंगियामुड़ा गांव में अब तक किसी भी उम्र के किसी भी व्यक्ति ने टीका नहीं लगवाया है। आसपास पड़ोस के गांवों में वैक्सीन लगवाने के बाद महीनेभर बुखार, अपाहिज होने व मौत की अफवाह के कारण यहा के लोग कोविड वैक्सीन नहीं लगाना चाहते हैं। जबकि गांव में 45 + आयु वालों की संख्या अच्छी खासी है।
भास्कर की टीम धुंगियामुड़ा गांव पहुंची तो मितानिन पद्मनी सौरी से मुलाकात हुई, उसने बताया कि यहां सिर्फ 6 महिलाओं ने ही कोरोना का दोनों टीका लगवाया है, जिनमें 4 मितानिन व 2 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। इसके अलावा कोई नहीं, समझाने व टीका का महत्व समझाने जाते हैं तो वे नहीं मानते हैं। पास में ही घर के बाहर खटिया पर लेटे मौजूद बुजुर्ग मोतीराम से वैक्सीन लगवाने को लेकर पूछा गया तो वे कहने लगे मेरी तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए नहीं लगाया, फिर बोले माता आई है। इतने में ही एक बुजुर्ग आए और हमें कहा कि यहां क्या पूछते हो, बरगद के पेड़ के नीचे जाओ, वहां सब हैं।
उनसे पूछना तब जवाब मिलेगा। बरगद के पेड़ के नीचे करीबन 30 लोग बिना किसी मास्क व सोशल डिस्टेसिंग के बैठे हुए थे। वहां भीड़ में खड़ा एक शख्स गांव का सरपंच हेमंत कुमार नागेश भी थे। उनसे ही जब अब तक गांव में एक भी वैक्सीन नहीं लगवाने को सवाल किया गया तो वे कहने लगे कि अब बगल के ही मेरे गाँव मुखागुड़ा में अधिकतर लोगों को पहला डोज लग गया है, उनमें से कई को बुखार आया, चलने में परेशानी आने लगी है। यह सुनकर यहाँ के लोग नहीं लगा रहे हैं।
उन्हें डर भी है। सरपंच कहने लगे के अब उनका डर सही भी है, महीनेभर बुखार आता है, जब उन्हें टीम ने बताया कि महीनेभर नहीं, कुछ दिन आता है, वह भी सभी को नहीं। तो वे कहने लगे अब कुछ गांव में टीका लगवाने के बाद मरने की घटना सुनाई दी है, इसलिए और नहीं लगा रहे हैं। अब सीईओ, स्वास्थ्य अधिकारी भी आकर समझा चुके हैं। ये नहीं मान रहे हैं, तो क्या कर सकते हैं। देखते ही देखते उस बरगद के नीचे 50-60 व्यक्ति इकट्ठा हो गए, जिनमें अधिकतर 50-70 उम्र वाले ही थे। सभी सरपंच की बातों पर हामी भर रहे थे।
क्यों लगवाए टीका : मौके पर मौजूद 60 साल के गोकुल सिंह कहने लगे कि अब डर मानो या कुछ हम कोरोना वैक्सीन नहीं लगाएंगे। हम बीमार नहीं हैं, ना ही किसी को कोई परेशानी है। जब ठीक हैं तो टीका क्यों लगवाएं।
समझा रहे: अपाहिज नहीं होंगे और जान बचेगी
देवभोग बीएमओ डॉ अंजू सोनवानी ने बताया कि कई बार हमारी टीम दौरा की है, लोगों को जागरूक कर रहे हैं लेकिन वे अफवाह पर ही विश्वास कर रहे हैं। जबकि टीका लगने के कुछ दिन बाद बुखार व हाथ पैर में दर्द आना सामान्य है, 2-3 दिन ऐसा हो सकता है। इससे कोई अपाहिज या मौत की घटना यहां नहीं हुई है।
माता को बुखार का कारण मान रहे ग्रामीण
गांव की मितानिन व अन्य लोगों ने बताया कि अभी कुछ महीने से अलग अलग घर में माता (चेचक) के कारण बुखार आने की बात कही जा रही है। फीवर आने पर अब तक गांव के किसी भी व्यक्ति ने अपनी जांच नहीं कराई है। इसे लेकर भी वे तैयार नहीं है। टेस्ट नहीं कराने के कारण मरीजों की वास्तविक स्थिति का पता लगाना कठीन हो रहा है।
