छत्तीसगढ़ में हाथी प्रभावित क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रेनों की गति और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे राज्य सरकार

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हाल ही में छत्तीसगढ़ में एक हाथी की रेल दुर्घटना में मृत्यु होना अत्यंत दुखद और चिंताजनक घटना है। यह केवल एक वन्यजीव की मृत्यु नहीं, बल्कि हमारी प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता के लिए बड़ी क्षति है।
हाथी भारत का राष्ट्रीय विरासत पशु है। छत्तीसगढ़ के कई वन क्षेत्र हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्ग (कॉरिडोर) हैं, जहाँ से रेलवे लाइनें भी गुजरती हैं। ऐसे क्षेत्रों में ट्रेनों की तेज गति हाथियों और अन्य वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन रही है। भारत के विभिन्न राज्यों में पहले भी कई हाथियों की मृत्यु रेल दुर्घटनाओं में हो चुकी है, जिसके कारण वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञ लगातार विशेष सुरक्षा उपायों की मांग करते रहे हैं।

वन्यजीव प्रेमी वैभव जगने ने छत्तीसगढ़ शासन एवं रेलवे प्रशासन से मांग की है कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में निम्नलिखित कदम तत्काल लागू किए जाएँ—
1. हाथी कॉरिडोर और संवेदनशील वन क्षेत्रों में ट्रेनों की गति सीमित की जाए
2. रेलवे और वन विभाग के बीच रियल-टाइम समन्वय व्यवस्था बनाई जाए.
3. हाथियों की गतिविधियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक, सेंसर और अलर्ट सिस्टम लगाए जाएँ।
4. संवेदनशील रेल मार्गों पर विशेष निगरानी दल तैनात किए जाएँ।
5. हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए दीर्घकालिक संरक्षण योजना तैयार की जाए
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में भी ऐसी दुखद घटनाएँ दोहराई जा सकती हैं। विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

“हाथियों की सुरक्षा केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज और शासन-प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।”

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Author: kakajee

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