पति ने महिला को छोड़ा, अपने बच्चे को लेकर बैठी धरने पर, मांग रही है इच्छा मृत्यु, फिलहाल पुलिस ने किया हस्तक्षेप

by Kakajee News

काका जी स्पेशल
रायगढ़. शादी के सात फेरे लेने के बाद जहां पति अपने पत्नी को आजीवन साथ रखने का वचन देते हुए उसके हर सुख-दुख में साथ देने का वादा करता है लेकिन ऐसे सात फेरों की हकीकत जब हवा हो जाती है, जब कोई पति अपनी पत्नी को छोड़कर न केवल गायब हो जाता है बल्कि उसको साथ रखने से भी परहेज करने लगता है ऐसे मंे इंसाफ मांगने वाली पत्नी को कलेक्टर के दरबार में आवेदन देने के बाद भी इंसाफ नही मिलता तो वह इच्छा मृत्यु की मांग नही मांगे तो क्या मांगे। चूंकि ऐसी मां जिसे पति ने छोड़ा और मासूम बच्चे को पालने तक के लिए उसके पास पैसे नही हैं ऐसी स्थिति में उसके लिए मौत ही एक सहारा है। फिलहाल इस मां को इस बार पुलिस ने समझाकर बचा लिया है, आगे क्या होता है यह प्रशासन के उपर है।
एक जानकारी के अनुसार कलेक्टर रायगढ़ के जन चौपाल में बीते नवंबर महीने में अपने पति की प्रताड़ना व ससुर के द्वारा पीड़िता को घर से निकाल देने के बाद जीवन यापन के लिए भरण पोषण राशि नही देने से होने वाली परेशानियों को देखते हुए जिलाधीश से इच्छा मृत्यु की मांग करते हुए अपनी मासूम बेटी व पिता के साथ जय स्तंभ चौक घरघोड़ा में धरने पर बैठ गई थी, पुलिस के द्वारा समझाईश देने के बाद फिलहाल वह धरने से उठ गई है।
पीड़िता मनीषा का कहना है कि उसकी शादी कुडुमकेला कोसमघाट निवासी विनोद पिता रामअवतार अग्रवाल के पुत्र शब्बु अग्रवाल के साथ सामाजिक रीति रिवाज के साथ खरसिया के अग्रसेन भवन में संपन्न हुआ था। शादी के बाद पति के द्वारा शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना किया जाता रहा है। इस दौरान एक बेटी हुई, उसके बाद पति शब्बु अग्रवाल का अन्य लड़कियों के साथ पिछले सालों से नाजायत संबंध होनें जानकारी मिली। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तो शब्बु के पिता ने मनीषा को 12 फरवरी 2020 को उसके मायके में यह कहकर छोड़ दिया कि आपकी बेटी और आपकी पोती मेरे बेटे के साथ नही रहेगी। पीड़िता का यह भी कहना है कि मेरे पिता शारीरिक व आर्थिक रूप से कमजोर हैं और हम मां बेटी का भरण पोषण करने में असमर्थ हैं, न ही मेरे ससुरालवाले मेरे और मेरी बेटी का भरण पोषण का राशि जमा करा रहे हैं। जिससे की जीवन यापन करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए पीड़िता मनीषा अग्रवाल कलेक्टर से इच्छा मृत्यु की मांग की है।
सिस्टम की नाकामी की वजह से अकेली मनीषा की यह कहानी नही है चंूकि आज भी अगर इंसाफ मांगने के लिए महिलाएं दर-दर की ठोंकरे खाती है तो वह सीधे-सीधे कानून का मजाक है चूंकि सच के साथ अगर कानून साथ रहता तो मनीषा जैसी महिला तपती गर्मी में अपने मासूम को गोद में लेकर भुखे प्यासे यूं ही नही बैठती! देखना यह है कि सिस्टम की आंख खुलती है या नही या फिर अंधा कानून पीड़ित मनीषा को उसके हाल पर मरने के लिए छोड़ देगा।

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