रायगढ़। रायगढ़ नगर निगम ने हाल ही में एक विज्ञप्ति के माध्यम से यह दावा किया है कि 26 करोड़ रूपये की लागत से शहर की सडकों को संवारा जा रहा है और इसमें सात कार्यो के लिये जल्द ही टेंडर बुलाने की बात कही गई है, जबकि हकीकत से कोसो दूर शहर के कुछ ही मार्गो में सड़कों के खड्ढे भरे गए हैं और कुछ सड़कों को सौ मीटर तक नया बनाया गया है और उसमें भी सड़क की चैड़ाई तीन फुट कम कर दी गई है। जिस पर बेजाकब्जाधारी बड़े आराम से अपनी दुकान लगा सकें।
रायगढ़ नगर निगम के स्टेडियम के आसपास और कलेक्टेªट सहित सिंधी कालोनी के अलावा कुछ अन्य जगहों में नगर निगम जिला कलेक्टर तारण सिन्हा की फटकार के बाद सड़कों को सुधारने में लगा है। इसके अलावा कुछ जगहों में पैबंध लगाकर सड़कों को सुधारने का दावा किया जा रहा है। हकीकत से कोसो दूर रायगढ़ के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां सड़कें गायब हो चुकी है और बरसात में यहां सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है। स्थिति यह है कि आये दिन इन इलाकों में छोटी मोटी दुर्घटना के अलावा कई बार वाहनों को भी बडा नुकसान पहुंचता है। हम आपको बता दें कि मालधक्का रोड से सावित्री नगर जाने वाली सड़क पूरी तरह गड्ढो में तब्दील हो चुकी है और यहां आये दिन वाहनों की आवाजाही से दुर्घटनाएं आम हो चली है।
मालधक्का से लेकर सावित्री नगर होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर व कलिंदी कुंज को जोड़ने वाली सबसे प्रमुख सड़क स्थानीय पार्षदो की अनदेखी के चलते अपनी दुर्दशा पर आंसु बहा रही है और यहां के लोग रोजाना धूल के गुब्बार से परेशान हैं। इतना ही नही इस इलाके में बड़े-बड़े शो रूम भी खुल रहे हैं और निर्माण कार्य भी धड़ल्ले से जारी हैं बावजूद इसके नगर निगम यहां की सड़क को नजर अंदाज कर चुका है। यहां की सड़कों पर बने गड्ढे थोडी सी बरसात में तालाब का रूप ले लेते हैं। मालधक्का इलाके के पास का पुलिया तो चार से पांच फुट गड्ढो से ऐसा हो गया है कि वहां कभी गंभीर दुर्घटना घट जाये तो आश्चर्य नही होगा। स्थानीय लोगों ने कई बार इस सड़क को बनवाने की मांग की है, लेकिन न तो पार्षद की नींद खुलती है और न ही निगम के अधिकारी इस पर ध्यान देते हैं। इतना जरूर है कि इलाके में अवैध निर्माण की वसूली के दौरान वे सक्रिय हो जाते हैं।
जिला कलेक्टर तारण सिन्हा की पहल पर कुछ सड़कों को नया रूप दिया गया है लेकिन इनमें भी निगम के कार्यपालन यंत्री उपाध्याय द्वारा सड़कों की चैड़ाई व निर्माण में मनमानी की है। बताया जा रहा है कि नई सड़कों में चैड़ाई कम कर दी गई है और गड्ढो को पाटने के लिये भी जमकर लापरवाही बरती जा रही है। इसका जीताजागता नजारा कलेक्टेªट से लेकर जेल परिसर को जोड़ने वाली सड़क में देखा जा सकता हैं जहां 50 से अधिक बड़े गड्ढो को छोड़ दिया गया है और वहीं कुछ गड्ढो को पाटकर यह बताया गया है कि सड़क की मरम्मत कर दी गई है।
सड़कों को खोदने के लिये नही बना है कोई नियम
एक तरफ तो नगर निगम करोड़ो रूपये खर्च करके शहर की सड़कों को नया बनाने के दावे करके जनता को यह बता रहा है कि निगम में बैठे पदाधिकारी व कर्मचारी जनहित के मामलों में गंभीर हैं वहीं शहर के मोहल्लों में नल कनेक्शन देने के लिये सडकों को बेतरतीब से खोदकर छोड़ दिया जाता है उससे लगता है कि निगम की सहमति से ही नई सड़कों को फिर से न केवल खोद दिया जाता है बल्कि बड़े-बड़े गड्ढे करके छोड़ दिये जाते हैं शहर के चक्रधर नगर इलाके से लेकर कई मोहल्लों में यह नजारे आम हो चले हैं जहां करोड़ो की सड़क देखते ही देखते खोद दी जाती है और इस पर निगम कभी भी संज्ञान नही लेता।
