कैसे लगता है सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण, दोनों में क्या है अंतर, जानिए अंतरिक्ष का विज्ञान

by Kakajee News

अक्तूबर का महीना खगोलीय दृष्टि से से बेहद खास रहने वाला है, क्योंकि इस एक महीने में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों लगने जा रहे हैं। 14 अक्तूबर शनिवार को सूर्य ग्रहण लगेगा, तो वहीं ठीक 15 दिन बाद 28 अक्तूबर को चंद्र ग्रहण लगेगा। अमेरिका में सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, जबकि एशिया समेत दुनिया के बाकी इलाकों में चंद्र ग्रहण नजर आएगा। आखिर ग्रहण क्या होते हैं और सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण में क्या अंतर होता है? आज हम आपको इस बारे में बताएंगे।

हमारे सबसे नजदीक का सितारा सूर्य अपने स्थान पर स्थित है और धरती इसका चक्कर लगाती है। धरती के साथ चंद्रमा भी सूर्य की परिक्रमा करता है। हालांकि चांद धरती का भी चक्कर लगाता है और इस दौरान वह पृथ्वी के नजदीक और दूर होता रहता है। सूर्य ग्रहण भारत में नहीं नजर आएगा। सूर्य ग्रहण उत्तरी अमेरिका, कनाडा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, ग्वाटेमाला, मैक्सिको, अर्जेटीना, कोलंबिया, क्यूबा, बारबाडोस, पेरु, उरुग्वे, एंटीगुआ, वेनेजुएला, जमैका, हैती, पराग्वे, ब्राजील, डोमिनिका, बहामास, आदि स्थानों पर नजर आएगा।

क्या है सूर्य ग्रहण
जब सूर्य और धरती के बीच में चंद्रमा आ जाता है, तो चांद के पीछे सूर्य का बिंब कुछ समय के लिए पूरी तरह से ढक जाता है। इस प्रक्रिया को ही सूर्य ग्रहण लगना कहा जाता है। इस दौरान जिस जगह पर परछाई पड़ रही होगी वहां आसमान में सूर्य आधा या पूरा ढका नजर आएगा।
14 अक्तूबर को वलयाकार सूर्य ग्रहण अमेरिका में नजर आएगा। यह एक ऐसा सूर्य ग्रहण है, जिसमें धरती से चांद दूर होता है। इसलिए यह सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता है, जिससे आसमान में आग की रिंग नजर आती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आते हैं, तो सूर्य ग्रहण लगता है।

इतने प्रकार के होते हैं सूर्य ग्रहण?
सूर्य ग्रहण एक नहीं बल्कि तीन प्रकार के होते हैं। पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण और वलयाकार सूर्य ग्रहण। 14 अक्तूबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण वलयाकार होगा। वलयाकार सूर्य ग्रहण की स्थिति तब बनती है, जब धरती से चंद्रमा दूर होता है। इस दौरान चांद, सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता है, लेकिन इस दौरान सूर्य रिंग आफ फायर जैसा नजर आता है और आकार में भी छोटा नजर आता है।

क्या है चंद्र ग्रहण
आसमान में चंद्रमा सूर्य के प्रकाश की वजह से चमकता है, लेकिन कई बार सूर्य और चंद्रमा के बीच में धरती आ जाती है। इसकी वजह से धरती की परछाई चांद पर पड़ती है, जिसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है। सूर्य ग्रहण की तरह वलयाकार चंद्र ग्रहण नहीं होता है, क्योंकि चांद के मुकाबले धरती काफी बड़ी है। इसकी वजह से उसकी परछाई काफी पर्याप्त होती है। अगर पूर्ण चंद्र ग्रहण हो तो चांद उम्ब्रा से होकर गुजरेगा जो पूर्ण परछाई वाली जगह होता है। 28 अक्तूबर को चंद्र ग्रहण लगेगा और यह भारत में भी नजर आएगा।

सूर्य और चंद्र ग्रहण की खास बातें
सूर्य ग्रहण के तरह चांद पूरी तरह गायब नहीं होता है और रंग लाल हो जाता है।
वायुमंडल में लाल रोशनी की वजह से ऐसा होता है।
सूर्य और चंद्रग्रहण दोनों ही पूर्ण और आंशिक हो सकते हैं।
सूर्य ग्रहण नजर आएगा या आधा वह इस बात पर निर्भर होता है, कि उसे कहां से देखा जा रहा है।
करीब हर 18 महीने में कहीं न कहीं धरती पर पूर्ण सूर्य ग्रहण होता है।

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