वृंदावन कालोनी में हुई दो मजदूरों की मौत मामले में जांच फाईलों में कैद, चार-चार विभाग ने नोटिस के जरिए दिखाई थी तेजी, अब तक गरीब परिवार को नही मिला न्याय

by Kakajee News

रायगढ़. भगवानपुर रोड स्थित वृंदावन कालोनी के बाहर निर्माणाधीन भवन के ऊपर से गुजरे हाईटेंशन तार की चपेट में आने से दो श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई थी। यहां अनिल केडिया के मकान का निर्माण कार्य चल रहा था और छत की ढलाई के लिए छड़ बांधने के दौरान बड़ा हादसा हुआ था। इस मामले में नगर निगम की अनुमति तक नही थी इतना ही नही घटना के बाद कलेक्टर भीम सिंह के निर्देश पर पुलिस, विद्युत विभाग, प्रशासन के अलावा नगर निगम ने नोटिस के जरिए गरीब मजदूरों की मौत पर तत्कालीन न्याय दिलाने के साथ-साथ दोषी पर कडी कार्रवाई के लिए नोटिस-नोटिस का खेल खेला था। लेकिन एक महीने 10 दिन से अधिक का वक्त गुजर गया है और अब तक दोनों मजदूरों की मौत पर कौन दोषी है और किस पर कार्रवाई हुई यह आज तक पता नही चला है। नगर निगम के रवैये पर कलेक्टर ने न केवल फटकार लगाई थी बल्कि दोषियों पर 24 घंटे के भीतर कडी कार्रवाई करने को कहा था। पर मामला रफा-रफा करने के लिए अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट शायद फाईलों में दबा दी है। यहां यह बताना लाजमी होगा कि भगवानपुर रोड में अनिल केडिया का भवन बन रहा था। जहां 18 दिसंबर की रात किशोर निषाद पिता अर्जुन निषाद (24 ) निवासी ग्राम घुता तथा चेतन वैष्णव पिता चमार दास (48) निवासी ग्राम अंडोला थाना सारंगढ़ काम कर रहे थे। रात लगभग 10 बजे छत की ढलाई के लिए छड़ को इधर-उधर करने के दौरान पास से गुजर रहे हाईटेंशन तार के संपर्क में आ गए। इससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना की जानकारी होने पर मृतक के स्वजन सुबह 10 बजे मौके पर पहुंचे। चेतन दास की चार बेटियां और एक बेटा है। वहीं जय किशोर का दो साल की एक बेटी है। इन दोनों मजदूरों की मौत के बाद जिस रफ्तार से एक नही दो नही बल्कि चार-चार विभाग द्वारा नोटिस जारी करके जो तेजी दिखाई थी वह उतनी तेजी से मामले को दबाने के लिए भी अधिकारियों ने अब चुप्पी साध ली है। दोषी अनिल केडिया सहित मकान बनाने वाले ठेकेदार पर क्या कार्रवाई हुई ? यह बताने के लिए कोई भी विभाग का अधिकारी जवाब तक नही दे पा रहा है। रायगढ़ नगर निगम सहित अन्य विभाग ऐसे गंभीर मामलों में नोटिस-नोटिस का खेल खेलकर यह बात साफ कर चुके हैं कि यह मामला हाई प्रोफाईल व्यक्ति से जुडा है और इसलिए उसे बचाने के लिए दोनों मजदूरों की मौत के साथ-साथ मकान मालिक अनिल केडिया के सभी मामलों में लीपापोती करके फाईलों में कैद कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में जहां गरीबों के साथ न्याय के ढेरो वादे किये जाते हैं इसके ठीक विपरीत जिले के अधिकारी भूपेश बघेल सरकार को बदनाम करते हुए गरीबों पर ही अन्याय करने से नही चूके रहे हैं।

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