रायगढ:- मूल्यांकन और सत्यापन सत्र को संबोधित करते हुये मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही ने इसे मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण आयाम बताया है, शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने मानव जीवन में जागृति के लिए मूल्यांकन और सत्यापन अनिवार्य प्रक्रिया है,जो जीवन विद्या शिविरों से स्पष्ट जानकारी होता है, सही मूल्यांकन नहीं कर पाने के कारण मानव सही सत्यापन नहीं करता और गलती और, अपराध में फंस जाता है,
अभ्युदय संस्थान अछोटी मानवीय मूल्यों पर कार्य करती है, इसीलिए अछोटी के प्रति मूल्यांकन कर हम पाते हैं कि हर व्यक्ति उपकार विधि से अपने स्तर पर समझदारी के बाद बहुत कुछ कर सकता है, श्रीमती अनीता शाह दीदी, अभिभावक विद्यालय संचालिका रायपुर ने भगवान शब्द को परिभाषित करते हुए बताया कि जो हमें देते हैं ,वहीं हमारे भगवान हैं, जैसे हमारे माता-पिता और गुरुजी हमें समझ देते हैं,कि हम कैसे उत्सव पूर्वक जी सकते हैं? सही मूल्यांकन ,व सत्यापन से खुशियां व अपनापन बढ़त बढ़ता है, महावीर अग्रवाल, स्वराज्य परिसर अछोटी ने मूल्यांकन व सत्यापन से स्वयं को विकसित करने का बात कहा, जीवन विद्या शिविर प्रबोधन कर रहे इंजीनियर चंद्रशेखर व मीनाक्षी राठौड़ ने अपना मूल्यांकन और सत्यापन करते हुए बताया कि इंजीनियरिंग से उन्हें सुख नहीं मिला,सुख जीवन विद्या की समझ से मिला,और सुखी होने के लिए हम प्रयास करते हैं, लगभग ६०जीवन विद्या प्रतिभागियों ने मूल्यांकन व सत्यापन करते हुए आगामी और सत्रों में दुबारा जीवन विद्या शिविर करने का मन बताया है,व मानव के निऱंतर सुखी होने के लिए एकमात्र आधार बताया है,
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