101 हथियारों के साथ 108 माओवादियों का समर्पण 1 किलो सोना और 3.60 करोड़ नगद की रिकॉर्ड बरामदगी

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बस्तर । छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के अंतर्गत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 108 माओवादी कैडरों ने जगदलपुर में सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण किया। इनमें 44 महिलाएँ और 64 पुरुष शामिल हैं।

इन सभी पर कुल 3.95 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। विभिन्न जिलों से आए इन नक्सलियों में बीजापुर से 37, दंतेवाड़ा से 30, सुकमा से 18, बस्तर से 16, नारायणपुर से 4 और कांकेर से 3 शामिल थे।

इस सरेंडर के साथ ही सुरक्षा बलों (छत्तीसगढ़ पुलिस, CRPF, COBRA आदि) को अब तक की सबसे बड़ी नक्सली डंप बरामदगी मिली है। सरेंडर करने वाले कैडरों की निशानदेही पर विभिन्न स्थानों से बरामद सामग्री में शामिल हैं:

यह बरामदगी नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी मानी जा रही है। बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने इसे क्षेत्र की बदलती तस्वीर बताया और जोर दिया कि यह पहल केवल हथियार छुड़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि भटके हुए युवाओं को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

108 माओवादी कैडरों का सामूहिक आत्मसमर्पण और उसके साथ जुड़ी अब तक की सबसे बड़ी डंप बरामदगी स्पष्ट संकेत देती है कि नक्सल संगठनों की आर्थिक और सैन्य ताकत अब टूटने की कगार पर है।

केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 की समय-सीमा से महज 20 दिन पहले यह उपलब्धि ‘नक्सल मुक्त भारत’ के लक्ष्य को वास्तविकता के निकट ला रही है। ‘पूना मारगेम’ जैसी पुनर्वास नीतियाँ “जो हिंसा छोड़ने वालों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सम्मान का आश्वासन देती हैं, सिद्ध कर रही हैं कि विकास और संवाद बल प्रयोग से अधिक प्रभावी हथियार हैं।

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Author: kakajee

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