छत्तीसगढ़ में रायगढ़ बना हाथी शावकों का मौत का गढ़ ,वन्यजीव प्रेमियों ने जताई चिंता

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रायपुर । रायगढ़ वन मंडल छत्तीसगढ़ में हाथी शावकों की मौत का गढ़ बन गया है। वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ में कुल 15 हाथियों की मौत हुई थी। जिनमें से छ: हाथी शावक पानी में डूबने से मरे थे अर्थात कुल मौतों में से 40% हाथी डूबने से मरे थे जो कि सभी शावक थे। उनमें से चार अर्थात छत्तीसगढ़ की कुल मौतों का 25% रायगढ़ में पानी में डूबने से मरे, वे भी सभी शावक थे।
हाल ही में दो और हाथी शावकों के शव रायगढ़ में कुरकुट नदी मैं तैरते हुए पाए गए। बताया जा रहा है कि नदी पार करते वक्त नदी में पानी खींचने के लिए लगाए गए अवैध पंप में करंट प्रभावित होने के कारण दोनों शावकों की मौत हो गई। इस प्रकार 15 महीने में रायगढ़ वन मंडल में छह हाथी शावकों की मौत हुई है। शावकों इतनी मौतें रायगढ़ में ही क्यों हो रही है? वों भी तब जब कि वन विभाग हाथी मित्र दलों से हाथियों की 24×7 मॉनिटरिंग का दावा करता है। इसे लेकर वन्यजीव प्रेमियों ने चिंता जाहिर की है कि रायगढ़ में ही हाथी शावकों की मौत क्यों हो रही है क्या इन्हें जान बूझ कर तो नहीं मारा जा रहा है ताकि ये बड़े होकर समस्या न बने।
हाथियों और उनके शावकों की हर सप्ताह होती मौतों पर शासन स्तर पर बड़े कदम उठाने की आवश्यकता है जिला सेव फॉरेस्ट के अध्यक्ष नरेश शर्मा ने कहा है कि ऐसे गंभीर मामलों में वन विभाग को हाथी प्रभावित इलाकों में सतत निगरानी रखते हुए हाथियों की मौतों पर अंकुश लगाने के लिए कड़े कदम उठाना चाहिए।उन्होंने यह भी चिता जताई है कि रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडल में तेजी से इनकी बढ़ती संख्या के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने की जरूरत है। सेव फॉरेस्ट टीम के अध्यक्ष ने बताया कि दोनों वन परिक्षेत्र में तेजी से उद्योगों की स्थापना होने के साथ साथ जंगलों की बेतहाशा कटाई आने वाले समय में हाथियों के इलाकों को कम करते जाना भी चिन्ता का विषय है। हाथियों के कारीडोर के लिए तत्काल पहल नहीं हुई तो ये मौतें रुकने का नाम नहीं लेगी।

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Author: kakajee

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