20 गावों के डेढ़ सौ से अधिक किसानों को दिया गया प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण, भारत सरकार के नेशनल मिशन आॅन नेचुरल फार्मिंग के तहत जिंदल फाउंडेशन का आयोजन

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रायगढ़। तमनार क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से छर्राटांगर में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र के करीब 20 गांवों के डेढ़ सौ से अधिक किसान शामिल हुए।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा नेशनल मिशन आॅन नेचुरल फार्मिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिंदल फाउंडेशन के साथ मिलकर छर्राटांगर में प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सांसद राधेश्याम राठिया की पत्नी नींद्रावती राठिया थीं। अन्य अतिथियों में कृषि विज्ञान केंद्र रायगढ़ के प्रमुख व वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ बीएस राजपूत, वैज्ञानिक डाॅ केके पैकरा, एसडीओ क्षि इंदकुमार भगत, प्रभाष सिंह, श्रीकांत आदि उपस्थित थे। प्रशिक्षण में प्राक्तिक खेती शोध संस्था जबलपुर के संस्थापक ताराचंद बेरजी भी उपस्थित थे।
रासायनिक खाद के बजाय प्राकृतिक खेती करेंः बेरजी
प्राक्तिक खेती शोध संस्था के संस्थापक ताराचंद बेरजी ने किसानों को रासायनिक खाद के बजाय प्राक्तिक खेती करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने 20 साल के रिसर्च के बाद व्क्ष आयुर्वेद का रसायन आसव, आरिश्ट और भस्म रसायन बनाया है। उन्होंने किसानों को बताया कि ये व्क्ष रसायन केमिकल के रसासन से अधिक प्रभावी हैं। उन्होंने बताया कि रसायनिक खादों के बजाय प्राक्तिक खेती से पौधों में ग्रोथ होता है और फल व अनाज भी पौष्टिक होते हैं।
पराली न जलाएं उससे खाद बनाएं
जिंदल फाउंडेशन के सुरेश डनसेना ने किसानों से आग्रह किया कि वे अपने खेतों में पराली व कचरा न जलाएं साथ ही इन दिनों महुआ बिनने के लिए आग लगा दी जाती है उसे भी न जलाएं। उन्होंने बताया कि जिंदल फाउंडेशन द्वारा प्रभावित क्षेत्र के किसानों को बायो डी कंपोजर दिया जाता है उसे ले लें और उस कचरे व पराली से खाद बनाएं। उन्होंने कहा कि वे खाद नहीं बना पा रहे हैं तो जिंदल फाउंडेशन के एपीओ को पराली व कचरा को दे दें। उन्होंने यह भी बताया कि किसान जिन्हें जला देते हैं उसका उपयोग आजीविका के लिए भी कर सकते हैं इसका उपयोग मशरूम उत्पादन या फिर वर्मी कंपोस्ट बनाने में किया जा सकता है। वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए केचुआ जिंदल फाउंडेशन द्वारा फ्री में दिया जाता है।
प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी
केवीके रायगढ़ के प्रमुख डाॅ बीएस राजपूत ने किसानों को बताया कि रासायनिक खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है, इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ता है। उन्होंने किसानों से कहा कि वे प्राकृतिक खेती कर अधिक लाभ ले सकते हैं। नींद्रावती राठिया ने भी किसानों को केंद्र सरकार की योजना नेशनल मिशन आॅन नेचुरल फाॅर्मिंग का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया।

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Author: kakajee

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