सरकार तो भूपेश की भी रही…विधायक भी थे..मंत्री भी थे…महापौर भी थे…सभापति भी थे…जिला पंचायत अध्यक्ष भी थे… पुरी सेना थी केलो विहार वासियों ने उम्मीदों से वोट दिया होगा लेकिन पांच सालो के भूपेश सरकार ने कुछ नहीं किया…समय बदला कलेक्टर का पद छोड़कर राजनीति के आए रायगढ़ के माटी पुत्र ओपी ने पहला कठिन चुनाव खरसिया में लड़ा और हार गए अगला चुनाव रायगढ़ में लड़ा और रायगढ़ वासियों ने उम्मीदों से अधिक समर्थन दिया और ओपी चौधरी की ऐतिहासिक जीत हुई और वे साय सरकार के कुशल सारथी के रूप में वित्त मंत्री बने..
फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का चर्चित डायलॉग “एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है” आशय यह कि एक छोटी सी चीज महामानव को लाचार कर देती है। लेकिन रायगढ़ के *केलो विहार के लोगों ने आज साबित कर दिया कि *“एक वोट आदमी को बादशाह बना देता है, और बादशाह बनते ही वो जनता का सेवक बन जाता है
दशकों का दर्द एक फैसले से खत्म….
केलो तट से लगे केलो विहार वासी अपने घर के पट्टे के लिए भटक रहे थे। इस दौरान सरकारें आईं-गईं, कलेक्टर-मंत्री बदले, पर पट्टे की फाइल ‘वोट बैंक’ की राजनीति में दबी रही। केलो विहार वासी कहते थे — “हम आजाद भारत के गुलाम हैं। अपना घर है, पर कागज नहीं लेकिन न लोन मिलता, न नल कनेक्शन, न बच्चों की शिक्षा शादी के लिए घर गिरवी रख सकते।
फिर आया 2023 – जनता का एक वोट
रायगढ़ की जनता ने IAS की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए ओपी चौधरी पर भरोसा किया और उन्हें विधायक बनाया। विष्णु देव साय सरकार में वो वित्त मंत्री बने। कुर्सी मिलते ही ओपी चौधरी ने पहली समीक्षा बैठक मे अफसरों को कह दिया था “केलो विहार की फाइल 24 घंटे में मेरे टेबल पर चाहिए।”इसका निदान होना चाहिए…
नतीजा:-दशकों से जो नहीं हुआ 30 महीने में हुआ
राजस्व विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन ने मिलकर दिन रात मेहनत कर दस्तावेजीकरण पूरा कर असंभव काम को संभव कर दिया…
*खुद वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अपने हाथों से बुजुर्ग माताओं-बहनों को पट्टा वितरित किया गया..पट्टा मिलने के दौरान एक महिला ने कहा सास कहती थी – ‘मरने से पहले घर का कागज देख लूं’। वो तो चली गईं, पर आज उनका सपना पूरा हो गया। ये कागज नहीं, मेरी आजादी का दस्तावेज है।”
“फिल्म का डायलॉग — ‘एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना देता है’ लेकिन जनता का एक एक वोट आदमी को ताकतवर बना देता है’ रायगढ़ वासियों ने 2023 में जो वोट की ताकत दिखाई, उसी का नतीजा है कि आज दशकों का वनवास खत्म हुआ। पट्टा सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं है। ये केलोविहार वासियों के दशकों के संघर्ष के जीत का प्रमाण है…पहले विपक्षी दशकों तक ‘अतिक्रमणकारी’ मानकर डराते रहे लेकिन ओपी चौधरी के एक प्रयास ने केलो विहार वासियों को ‘भू-स्वामी’ बना दिया। फर्क साफ है — किसी के लिए आप वोट बैंक थे लेकिन ओपी के लिए परिवार
फोन नहीं उठा..मुलाकात नहीं हुई..उसके बाद भी असम्भव काम संभव हो गया
पट्टा के इंतजार में केलो विहार वासियों को आंखे पथरा गई दादा पिता इसके हक की लड़ाई लड़ते रहे…छग गठन के बाद हर चुनाव में विधायक को बदलते रहे…चुनाव के दौरान मिली उम्मीदों से वे खुश हो जाया करता थे लेकिन सत्ता मिलते ही उनकी फाइलें धूल खाती नजर आती थी सिस्टम को कोसते हुए केलो विहार वासियों के पास कोई चारा नहीं था…बस एक बार विधायक कार्यालय के अपना आवेदन इस उम्मीदों के साथ छोड़ा कि ओपी चौधरी कलेक्टर से राजनीति के आया है शायद इन्हें समझ होगी और ये काम करा सकता यही उम्मीद 65 हजार वोटो से जीताने वाले मतदाताओं की भी थी…शहर की राजनीति में एक ऐसा गैंग है जो पीठ पीछे घूम घूम कर नहीं मिलते…फोन नहीं उठाते…जैसे जुमलो से दुष्प्रचार में लगा रहता है…आज से पहले बहुत से नेता मिले होंगे मोबाइल भी उठाए होंगे लेकिन नतीजा क्या हुआ…बिना फोन उठाए जीना मिले जब जनता का काम होने लगे तो समझो साय का सुशासन बेहतरीन काम कर रहा है…केलो विहार वासियों को अब ऐसा ही विधायक चाहिए जो भले ही मोबाइल ना उठा पाए लेकिन उनका काम ईमानदारी से कर दे
केलो विहार वासियों पट्टा मिलने लाभ…
मकान है लेकिन पट्टा नहीं है इससे बहुत सी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता..मालिकाना हक बच्चों के एजुकेशन के लिए लोन के द्वार खोल देगा…जनता को पहले लगता था कि नेता सब चोर हैं। लेकिन ओपी को दिए गए एक वोट के यह सोच बदल दी सर ने एक वोट की कीमत आज रायगढ़ वासियों को अच्छे से समझ आई। मच्छर कमजोर करता है,लेकिन वोट ताकतवर।”
मतदाताओ के लिए प्रेरणा …
…..मच्छर जब लाईलाज बीमारी बन जाए तो उसकी दवाई का निदान वोटो से भी किया जा सकता है…दशकों से केलो विहार वासियों को राजनीति की चौखट में सिर्फ तारीखे मिली लेकिन उनके वोटों से विधायक बनने के बाद ओपी चौधरी ने 2024-26 में उन्हें पट्टा दे दिया।
अगला नंबर किसका…. रायगढ़ से जुड़ी बहुत सी अनसुलझे मामलों की फाइल ओपी चौधरी ने तलब कर ली है। क्योंकि उनका मानना है — “सरकार की कुर्सी पर बैठने का मकसद AC की हवा खाना नहीं, बल्कि दुखी जनता के आंसू पोछना
