कोरोना वायरस के मरीज ठीक होने के बाद भी सांस, किडनी से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इलाज के हफ्ते भर बाद ही कई मरीजों को दुबारा अस्पतालों में भर्ती करने की नौबत आ रही है। लम्बे समय तक ऐसे मरीजों केा ऑक्सीजन सपोर्ट और आईसीयू तक में रखने की नौबत आ रही है। कोरोना संक्रमण से उभरने के बाद पांच फीसदी तक मरीजों में पोस्ट कोविड इफेक्ट देखे जा रहे हैं।
गंभीर बीमारियां लेकर वापस लौट रहे मरीज
कोरोना की दूसरी लहर में कोविड 19 संक्रमण की चपेट में आए कई मरीज हफ्ते भर बाद ही सांस, किडनी और हार्ट से जुड़ी तकलीफों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। दून अस्पताल के कोरोना नोडल अधिकारी डा. अनुराग अग्रवाल एवं एचओडी मेडिसन डा. नारायणजीत सिंह ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में एक तो मरीज गंभीर रूप से बीमार हुए और ठीक होने के बाद बड़ी संख्या में दुबारा इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना का इलाज कराने के बाद पांच से छह फीसदी मरीज छाती में दर्द, सांस में दिक्कत, किडनी, अनियंत्रित शुगर, अपच जैसी बीमारियों के साथ वापस लौट रहे हैं और उन्हें भर्ती करना पड़ रहा है।
किडनी और हार्ट के मामले ज्यादा बढ़े
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में भी बड़ी संख्या में कोरोना के मरीज ठीक होने के बाद दुबारा भर्ती हो रहे हैं। इसमें किडनी, हार्ट और फेफडों में संक्रमण के साथ ही कमजोरी, ब्लड प्रेसर-शुगर ब्रेन संबंधी परेशानियों के मरीज अधिक हैं। हल्द्वानी में चार से पांच प्रतिशत मरीज दुबारा अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं। पहली बार में जो मरीज दस बारह दिन में ठीक हो गए उन्हें दुबारा 15 से बीस दिन तक भर्ती करना पड़ रहा है। अस्पताल के एमएस डा. अरुण जोशी, मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ विवेकानंद सत्यबली और डा. परमजीत सिंह का कहना है कि पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर के दौरान पोस्ट कोविड के मरीज बहुत बढ़ गए हैं। पहली लहर के बाद ऐसे मरीजों की संख्या बेहद सीमित थी।
महंत इंद्रेश: श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कोरोना नोडल अधिकारी डा. जगदीश रावत कहते हैं कि पोस्ट कोविड मरीजों को गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं। करीब पांच से सात फीसदी मरीज अस्पतालों में दुबारा भर्ती हो रहे हैं। कई को आईसीयू तक की नौबत आ रही है। फेफड़ों में गंभीर समस्या देखी जा रही है। मरीजों में हार्ट ब्लॉकेज की समस्या भी बढ़ रही है।
एम्स : कमजोर इम्युनिटी वालों को हो रही ज्यादा दिक्कत
एम्स ऋषिकेश में भी ठीक हो चुके पांच प्रतिशत के करीब मरीजों को फिर इलाज के लिए भर्ती होना पडा है। एम्स के कोविड नोडल अफसर डा.पीके पांडा ने बताया कि ऐसे मरीजों में कई तरह की दिक्कतें देखने में मिल रही है। कमजोरी, जोड़ों और मांशपेशियों में दर्द , नींद न आना, अवसाद की स्थिति जैसी दिक्कतें मरीजों में पैदा हो रही हैं। इसके अलावा कुछ लोगों को सांस सम्बन्धी दिक्कतें भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि कम इम्युनिटी वाले मरीजों को अधिक परेशानी हो रही है। हांलाकि उन्होंने कहा कि कोविड से ठीक होने के बाद मरीजों की मौत के मामले बहुत कम हैं।
चमोली में सिर्फ एक मामला :
चमोली जिले में कोरोना से ठीक होने के बाद एक मरीज दुबारा गंभीर संक्रमण की चपेट में आया और उसकी मौत हो गई। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाक्टर जे एस चुफाल ने बताया कि पूर्व में कोरोना संक्रमित एक ही मरीज अस्पताल पहुंचा और फिर उसे एम्स रेफर करना पड़ा। बाद में मरीज की मौत हो गई।
पांच जिलों में एक भी मरीज नहीं लौटा
हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा जिलों में एक भी ऐसा मामला सामने नहीं आया जब किसी कोविड संक्रमित मरीज को ठीक होने के बाद अस्पताल आना पड़ा हो। हरिद्वार में कोविड अस्पताल मेला के सीएमएस डॉ राजेश गुप्ता का कहना है कि एक बार पॉजिटिव से नेगेटिव होने के बाद उनके यहां भी कोई मरीज दोबारा पॉजिटिव होकर नहीं आया। हालांकि नैनीताल में 70, यूएस नगर जिले में दो और चंपावत में एक मरीज दुबारा इलाज के लिए अस्पताल पहुंचा। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में भी दुबारा कोई मरीज इलाज के लिए नहीं आया।
टिहरी :कोरोना से ठीक होने के बाद टिहरी जिले में 14 मरीज दुबारा इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती होना पड़ा। जिला सर्विलांस अधिकारी डा अबु रेहान ने बताया कि इनमें से अधिकांश मरीजों को सांस संबंधी दिक्कत की वजह से दोबार कोविड केयर सेंटरों में भर्ती होना पड़ा। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मरीजों को अलग अलग संक्रमण की वजह से बुखार की समस्या देखी गई है।
