सारंगढ़ । कोरोना काल की वजह से किसे रोजी रोटी नहीं छोड़नी पड़ी इस विषम परिस्थितियों में लगभग सभी ने अपने अपने हिसाब में आर्थिक क्षति सहन की है खासकर ग्रामीण अंचलों में के साथ नगर की बैंड बाजा बाजा से जीवन यापन करने वाले युवकों को खास असर पड़ा है क्योंकि शादी सीजन देवउठनी एकादशी के बाद से चालू हो जाता है ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में बैंड बाजे की बहुत मांग होती है पर पिछले 2 वर्षों से कोरोना दर्द झेल रहे बैंड वाले ग्रामीणों का बहुत तकलीफ का सामना करना पढ़ रहा है क्योंकि परिवार के भरण-पोषण और रोजी रोटी का एकमात्र सहारा होने की वजह से इसी मैं ही गुजर बसर होता है पर कोरोनावायरस की भयानक ग्रुप एवं शासन के निर्देशों का पालन करते हुए शादी विवाह में धार्मिक आयोजनों में पूरी तरह प्रतिबंध होने की वजह से बैंड बाजा पार्टी वालों मुफलिसी में दो वर्ष जिए तथा इस बीच किसी प्रकार की आयोजनों में इनका बाजा नहीं लगने से रोजी मजदूरी करके जीवन यापन करना पड़ा हालाकी कोरोन काल मैं आथिर्क क्षति सभी को हुआ है पर उन लोगों को फरक नहीं पड़ता जो सक्षम है उससे ज्यादा फर्क ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पड़ा है जिसका जीवन यापन इसी व्यवसाय से होता है जब शासन ने 20 लोगों की अनुमति दी है वर वधु पक्ष में तो कुछ लोग बचे हुए साथियों को बाजे गाजे के साथ करना चाहते हैं लेकिन उन्हें बैंड बाजे की परमिशन नहीं मिल रही है जिससे बाजू वालों की आर्थिक स्थिति परेशानी बन गई है और अपने परिवारों को जीवन यापन करने में दिक्कत हो रही है।
बाक्स==== बैंड बाजों के लिए शासन द्वारा परमिशन नहीं दी जा रही है वही धुमाल बैंड पार्टी डीजे आदि शादी विवाह एवं धार्मिक आयोजनों पर बजने वाली बजाओ शासन द्वारा परमिशन नहीं दी जा रही है और अभी जून और जुलाई में गिने चुने शादी विवाह होने को है जिसमें भी लोग बाजी की मांग कर रहे हैं लेकिन शासन द्वारा अनुमति ना देने से बुकिंग नहीं की जा रही है बाजे वाले का कहना है कि माध्यम से सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी चलती है और उनके यहां चूल्हा जलता है जून माह में 15 ,17 ,18,20,22,29,और 30 को शादियों का मुहूर्त देखकर लोगों ने बुकिंग भी आ रहे हैं लेकिन हमारे द्वारा बुकिंग नहीं लिया जा रहा है वहीं जुलाई में 1,2, और 16 की मुहूर्त है।

