रायपुर। लंबे समय से सिंचाई सुविधाओं में विस्तार की मांग कर रहे राजनांदगांव जिले के छुरिया व डोंगरगांव क्षेत्र के किसानों को अब जाकर बड़ी राहत मिली। खुर्सीपार जलाशय व मनेरी जलाशय के जीर्णोद्धार के साथ ही नहरों की मरम्मत से अब उन खेतों तक भी आसानी से पानी पहुंचाया जा सकेगा जो बांध के पास होकर भी प्यासे थे। दो जगहों पर 5.02 करोड़ रुपये खर्च कर सिंचाई के रकबे को 273 हेक्टेयर बढ़ा लिया गया। सिंंचाई सुविधाओं में विस्तार से किसानों को द्वीफसलीय खेती का अवसर मिल सकेगा।
किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शासन की ओर से वर्ष 2019-20 में दो 2 करोड़ 76 लाख रुपये की लागत से खुर्सीपार जलाशय व दो करोड़ 26 लाख रुपये की लागत से मनेरी जलाशय के मुख्य नहर के साथ बांध का जीर्णोद्धार कराया गया है। किसानों की आर्थिक समृ़द्धि शासन की प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
छुरिया विकासखंड के ग्राम खुर्सीपार स्थित खुर्सीपार जलाशय से पहले मात्र 2 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो पाती थी, लेकिन अब मुख्य नहर एवं बांध के जीर्णाेद्धार के बाद इस वर्ष 404 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध हो सकी। सिंचाई क्षेत्र में 204 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। विगत सात वर्षों से ग्राम करेठी व केरेगांव में पानी नहीं पहुंच पाता था। इस वर्ष किसानों को पर्याप्त पानी मिला। जीर्णोद्धार होने से सिंचाई क्षमता बढ़ी और सिंचाई सुविधा का विस्तार हुआ। जिससे इस क्षेत्र के किसानों में हर्ष व्याप्त है।
अब 307 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा
मुख्य कार्यपालन अभियंता जल संसाधन उमेश मिश्रा ने बताया कि डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम मनेरी स्थित मनेरी जलाशय से पहले 238 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो पाती थी। वर्ष 2019-20 में दो करोड़ 26 लाख रुपये की लागत से मुख्य नहर एवं बांध का जीर्णाेद्धार कराया गया जिसके बाद 307 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है। सिंचाई क्षेत्र में 69 हेक्टेयर की वृद्धि हुई। विगत 7 वर्षों से ग्राम जामसर तथा गुंगेली नवागांव में पानी नहीं पहुंच पाता था, इन ग्रामों में इस वर्ष किसानों को पर्याप्त पानी मिला, जिससे किसानों में प्रसन्नता है।
द्वीफसलीय खेती कर सकेंगे
बताया गया कि सिंचाई सुविधा में विस्तार के बाद किसानों को साल में दो बार फसल लेने का अवसर मिल सकेगा। पहले रबी सीजन के लिए ही किसानों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पाता था। अब खरीफ फसलों के लिए भी भरपूर पानी इन जलाशयों से उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
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