भाजपा नेताओं ने कृषि विभाग का किया घेराव, यूरिया की कमी से किसान त्रस्त

by Kakajee News

रायगढ़। किसान खाद के लिए त्रस्त है और भूपेश जी टीएस बाबा के साथ सत्ता संघर्ष में व्यस्त हैं। ष्किसान के साथ विश्वासघात, भूपेश सरकार का हाँथ कालाबाजारियो के साथष् का आरोप लगा कर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विवेक रंजन सिन्हा की अगुवाई में भाजपा के हजारों कार्यकर्ता आज गगनभेदी नारो के साथ सड़को पर उतर गए। हेमू कलाणी चौक में शहर भर से इकट्ठा हुए भाजपाइयों ने पैदल मार्च कर उप संचालक कृषि के कार्यालय पहुंच कर किसानों के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद की।


भारतीय जनता पार्टी ने आज एक बार फिर खाद के मुद्दे पर भूपेश सरकार को घेरा। इस बार पैदल मार्च करके भाजपा कृषि उपसंचालक के कार्यालय जा पहुंची और जम कर नारेबाजी करते हुए यूरिया खाद व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की। चेतावनी भरे लहजे में आक्रोशित भाजपाइयों ने कहा कि समय रहते यदि खाद व्यवस्था दुरुस्त नही की गई तो भाजपा उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगी। अधिकारियों पर कालाबाजारियो के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि भूपेश सरकार के अघोषित निर्देश पर ही अधिकारी खाद व्यपारियो से मिल कर रासायनिक खाद की काला बाजारी करवा रहे है।


भाजपा जिलाध्यक्ष उमेश अग्रवाल.ने कहा कि पिछले ढाई वर्षो से हर फसल के दौरान जिले के किसानों को खाद ध् यूरिया के संकट का सामना करना पड़ रहा है। रासायनिक खाद से जूझते किसान कालाबाजारियों पर आश्रित हो गए है जो बेहद दुखद और शर्मनाक है। वर्तमान में किसानों को 266 रुपये का यूरिया 600 -700 रुपये प्रति बोरी के दर से जबकि डीएपी 1200 रुपये प्रति बोरी की जगह 1500 रुपये में खरीदनी पड़ रही है । बार – बार सरकार और विभाग का ध्यान आकृष्ट कराए जाने के बावजूद किसानों को सोसायटी से खाद उपलब्ध नही कराई जा रही है जिससे विभाग के अफसरों की कालाबाजारियों के साथ संलिप्तता प्रतीत होती है जिसकी जांच होनी चाहिए।


भाजपा नेता गुरपाल भल्ला ने कहा कि कृषि विभाग की भूमिका संदेहास्पद इस लिए भी है क्यो कि हर ब्लाक में खाद को कालाबाजारियों ने दुगनी कीमत पर बेचा गया और आज भी बेचा जा रहा है मगर जिले भर में तैनात बीस उर्वरक निरीक्षकों में से किसी ने भी किसी भी ऐसे खाद विक्रेता के विरुध्द जांच कर कभी कोई कार्यवाही नही की। क्या विभाग की यह उदासीनता कालाबाजारियो के साथ संलिप्तता को इंगित नही करता ?


भाजपा नेता मुकेश जैन ने कहा कि कृषि विभाग इस दस्तावेज सार्वजनिक करे और बताए कि आखिर किन कारणों से सोसायटी के लिए खाद का आबंटन कम किया गया और किसके आदेश से मुनाफाखोर खाद व्यापारियो को अधिकतम आबंटन दिया गया। यह तथ्यगत है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रयाप्त मात्रा में उर्वरक की सप्लाई दी गई इसके बावजूद आखिर खाद संकट क्यो है ? विभाग इस तथ्य के दस्तावेज सार्वजनिक करें कि इस सत्र में जिले में कुल कितनी खाद की रैक आई और कितनी खाद सोसायटी में पहुंची और कितनी कालाबाजारियो के पास पहुंची। क्या यह सही नही है कि इस वर्ष 22828 टन नीम लेपित यूरिया के स्टॉक आया मगर उसमे से केवल 10 138 टन ही समितियों को आबंटित किया गया जबकि बाकी 12690 टन यूरिया निजी व्यपारियो को दे दी गई ? इसी तरह 17159 टन डीएपी में से केवल 8700 टन ही समितियों को दिया गया और बाकी 8459 टन व्यापारियो के हवाले कर दिया गया ? निजी व्यापारियों की कीमतों पर विभाग नियंत्रण रखने में आखिर क्यों नाकाम रहा ?

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