टी-20 वर्ल्ड कप शुरू हो चुका है और 22 गज की क्रिकेट की पिच महंगाई पर बल्लेबाज चौके-छक्के लगा रहे हैं, लेकिन महंगाई की पिच पर तो सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, सोया और सूरजमुखी जैसे खाद्य तेल दोहरा शतक लगा कर डटे हुए हैं। वहीं, मैसूर में वनस्पति (पैक) ने तिहरा शतक ठोंक दिया है। महंगे पेट्रोल, डीजल और एसएलपीजी तो पहले से ही आम आदमी को पस्त कर चुके हैं, वहीं आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए सरकार की फिल्डिंग को महंगाई तहस-नहस कर रही है।
उपभोक्ता मंत्रालय पर उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक अलीगढ़ के खुदरा बाजारों में 15 अक्टूबर को प्याज 80 रुपये प्रति किलो की दर से बिका था तो सबसे सस्ता 22 रुपये के रेट से अंबिकापुर, रीवा और बीजापुर में। इसी तरह अगर आलू की बात करें तो बीकानेर में यह 36 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, लेकिन साहिबगंज वालों के लिए सबसे सस्ता 12 रुपये किलो भी था। टमाटर भी कम नहीं है। रायगंज में 15 अक्टूबर को 76 रुपये था तो बीजापुर में 18 रुपये और आज कुशीनगर में 80 रुपये है।
अगर पिछले दो हफ्तों की बात करें तो टमाटर के भाव दोगुने बढ़े हैं। सरकार के मुताबिक टमाटर का अधिकतम मूल्य 75 और न्यूनतम 11 व मॉडल मूल्य 40 रुपये है। वहीं अगर प्याज की बात करें तो अधिकतम मूल्य 60, न्यूनतम 17 और मॉडल मूल्य 30 रुपये प्रति किलो है। तुरा में तो यह 60 रुपये किलो पहुंच गया है। वहीं, सदाबहार आलू भी कई जगहों पर 16 रुपये प्रति किलो तक महंगा हो चुका है।
