कोरबा। जिले में धान बिक्री के लिए 32 हजार 590 किसानों ने पंजीयन कराया है। जनवरी माह में शनिवार, रविवार और अन्य अवकाश को छोड़ दिया जाए तो उपार्जन के लिए केवल 19 दिन शेष रह गए हैं। अब तक 16429 किसानो ने ही धान बिक्री की है। अब भी 16 हजार 161 किसानों धान बिक्री के लिए शेष हैं। अब तक 6.27 लाख धान की खरीदी हो चुकी है। बार दाने की कमी और सुस्त उठाव के चलते खरीदी के लिए समय नहीं बढ़ी, तो सीमित दिनों में शेष पंजीकृत किसानों से पूरा धान खरीदने में समस्या होगी।
धान खरीरी का लक्ष्य 12.50 क्विंटल निर्धारित किया गया है, लेकिन अब तक हुई खरीदी और बिक्री के लिए शेष किसानों के लिहाज उपार्जन केंद्रों में लक्ष्य से भी अधिक आवक की संभावना है। खरीदे गए कुल धान की कीमत पर गौर किया जाए तो अब तक एक अरब 17 करोड़ 18 लाख 15 हजार 494 रूपए की धान खरीदी हो चुकी है। किसानों को समय पर भुगतान नहीं हो रहा।
इस बार संभागीय सहकारी बैंक से भुगतान हो रही है। राशि पाने में सप्ताह के बजाए पखवाड़े भर का समय लग जा रहा है। खरीदी के लिए बार दानों का संग्रहण ठप पड़ गया है। समय रहते केंद्रों में आपूर्ति नहीं हुई तो उपार्जन बंद होने की संभावना है। इसी तरह जिस मात्रा में धान की आवक केंद्रों में हो रही उसके विपरीत उठाव नहीं हो रहा। उपार्जन केद्रों में 2.52 लाख क्विंटल उठाव के लिए अब भी से हैं।
मोटा धान का उपार्जन अधिक
कुल 6.27 क्विंटल हुई खरीदी में सबसे अधिक 5.45 क्विंटल मोटा धान की खरीदी हुई है। सरना धान 68,877 क्विंटल उपार्जित हुआ है। सबसे कम 13,333 क्विंटल पतले धान की खरीदी हुई है। मोटा और पतला धान की कीमत में खास अंतर नहीं होने के कारण ज्यादातर किसानों ने मोट धान की ही पैदावार की है।
धान रखने के लिए जगह की समस्या
जिले में 32 हजार 590 किसानों ने 48 हजार 329.88 हेक्टेयर रकबे की उपज को बेचने के लिए पंजीयन कराया है। अब तक 23 हजार 875.18 हेक्टेयर के धान उपज की खरीदी हो चुकी है। डी ओ काटने के बाद भले ही कागज में 2.52 क्विंटल धान उठाव के लिए शेष बताया जा रहा है, लेकिन उपार्जन केंद्र धान से भर गए हैं। इससे जगह की कमी के चलते खरीदी करने में समस्या हो रही है।
