रायगढ़. यूं तो रायगढ़ नगर निगम अपने कई क्रिया कलापों के चलते काफी चर्चा में है लेकिन जब जनहित का मामला आता है तब इनके अधिकारी कार्रवाई के बजाए मीठी नींद में सो जाते हैं और उनके नींद में खलल डालने वालों पर वे टूट पड़ते हैं। ऐसा ही एक नजारा बीते कई दिनों से रायगढ़ के पुरानी हटरी के पास पुरानी जूटमिल धर्मशाला को तोड़कर बनाये गए आलीशान आलोक सिटी माॅल के सेठ द्वारा मनमानी का देखने को मिलता है जहां बीते कई दिनों से एक सड़क पर निर्माण कार्य की सामग्री फैला दी गई है और वहां सुबह से लेकर शाम तक टैªफिक जाम की स्थिति बन जाती है। इसकी जानकारी नगर निगम को न तो ऐसा हो नही सकता। चूंकि इस जगह से मात्र दो सौ मीटर की दूरी पर नगर निगम आफिस है और सौ मीटर दूर पुलिस अधीक्षक कार्यालय है और ऐसे में दिनदहाड़े एक सड़क पर कब्जा कर लेना और कार्रवाई नही होना इस बात का प्रमाण है कि नगर सेठों के सामने अधिकारी नतमस्क हैं।
एक जानकारी के अनुसार आलोक सिटी माॅल में निर्माण कार्य के नाम पर रेत, गिट्टी व ईटा सड़क के पास डाल दी गई है और वहां से पैदल भी गुजरना मुश्किल है। त्यौहार के समय लगातार शहर आधे से अधिक समय तक जाम रहता है और यह इलाका शहर का हृदय स्थल है बावजूद इसके नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी इस मनमानी को रोकना तो दूर माॅल के सेठ से जानकारी तक नही लेते कि आखिरकार निर्माण कार्य की अनुमति ली गई है या नही और सड़क पर कब्जा किसके कहने से किया गया है। जबकि होता यह है कि ऐन दीपावली या कई मौकों पर सड़क जाम के नाम पर गरीबों के ठेले चंद घंटो में तोड़कर फेंक दिये जाते हैं और बुलडोजर से उनकी दुकानों को ध्वस्त कर दिया जाता है पर यहां तो ऐसा लगता है कि पूरी सड़क आलोक सिटी माॅल के मालिक को आबंटित कर दी गई है जिसके चलते बीते कई दिनों से इस सड़क पर उसका कब्जा है।
स्वच्छ भारत मिशन अभियान के नाम से शहर-शहर गली-गली सफाई के दावे किये जाते हैं लेकिन शहर के इस हृदय स्थल पर गंदगी चारो तरफ फैली हुई है। भीड भरे माहौल से जन जीवन खासा परेशान है और ऐसे में निगम आलोक सिटी माॅल के मालिक पर कोई कार्रवाई नही कर रहा है यह सोचनीय पहलू हैं। जानकार सूत्र बताते हैं कि यहां त्यौहारों के समय लगने वाले गरीबों के ठेलों से भी कथित तौर पर निगम तथा आसपास के लोग किराये लेते थे और अब इस सेठ की मनमानी के चलते पूरी सड़क अकेले उनके ब्जे में आ गई है। देखना यह है कि अधिकारी सोते से कब जागते हैं।
हम आपको यह भी बता दें कि सोशल मीडिया में भाजपा के एक नेता द्वारा बकायदा इस मुद्दे को सोशल मीडिया में भी उठाया गया है लेकिन प्रशासन है कि उसकी कुंभकर्णी नींद खुलती ही नही।
