बिलासपुर। जांजगीर जिले में पलायन की समस्या थमने का नाम नहीं ले रहा है। लाकडाउन की विषम परिस्थति से जूझने के बाद घर लौटे श्रमिकों को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में आर्थिक तंगी से जूझ रहे श्रमिक पलायन करने को मजबूर हैं। कृषि मजदूरी समाप्त होने के बाद भूमिहीन परिवार पलायन कर रहे हैं। श्रम विभाग ने पत्र जारी कर सभी जनपद सीईओ को अपने-अपने अधीनस्थ पंचायतों में पलायन रजिस्टर तैयार कराने का निर्देश दिया था मगर इसका पालन अधिकांश पंचायतों में नहीं हो रहा है।
लाकडाउन के दौरान काम बंद होने के चलते अन्य प्रांतों में फंसे मजूदरों के सामने रोजी रोटी का संकट उत्पन्न होने लगा था। जिसके चलते मजदूर अपने परिवार के सदस्यों का पेट भरने जैसे तैसे सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करके गांव वापस लौटे। वहीं लगातार मजदूरों की समस्याओं को देख राज्य शासन द्वारा अन्य प्रांतों में फ़ंसे मजूदरों को सुरक्षित घर तक पहुंचाने के लिए करोड़ों रूपये खर्च कर वापस लाया गया। जिले में सरकारी ऑकड़ों के अनुसार एक लाख 14 हजार 51 श्रमिक विभिन्न राज्यों से यहां लौटे।
साथ ही मजदूरों के लौटने के बाद उन्हें गांव में रोजगार उपलब्ध कराए जाने का दावा भी किया जा रहा है, मगर समय के साथ ही साथ परिस्थिति बदलने लगी। अब रोजगार व आर्थिक संकट से जूझ रहे भूमिहीन मजूदर फिर से पलायन करने को मजबूर हैं। हालांकि राज्य शासन व जिला प्रशासन द्वारा प्रवासी मजदूरों को गांव में रोजगार उपलब्ध कराने व पर्याप्त सुविधा मुहैया कराने के लिए कई योजनाओं के क्रियान्वयन का दावा भी किया जा रहा है, मगर विभागीय अधिकारियों की उदासीनता व पंचायत प्रतिनिधियों की मनमानी के चलते आज भी मजदूर पलायन करने को मजबूर हैं।
जिले में मनरेगा में पर्याप्त काम नहीं मिलने के कारण लोगों का इस पर से भरोसा उठा है। इसके चलते मजदूरों को पलायन करना पड़ता है। मजदूरों को आवश्यकता अनुरूप काम नहीं मिल पाता, इसलिए पलायन उनकी मजबूरी है। जिले के मजदूर हर साल जम्मू कश्मीर, पंजाब, उत्तरप्रदेश सहित अन्य राज्यों में पलायन करते हैं। जिले में अब फिर से पलायन का दौर शुरू होने लगा है। यहां अन्य प्रांतों की बसें मजदूरों को लेने गांव पहुंच रही है। जैजैपुर, मालखरौदा, बम्हनीडीह ब्लॉक सहित कई स्थानों से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा के लिए रवाना हो रहे हैं।
रोजगार सहायकों के आंदोलन के चलते मनरेगा का काम ठप
राज्य शासन द्वारा श्रमिकों को गांव में रोजगार उपलब्ध कराए जाने क लिए करोड़ों रूपये की कार्यों की स्वीकृति प्रदान कर इसे मनरेगा के माध्यम से काम कराया जा रहा है, मगर बरसात आने व पंचायतों में काम कम स्वीकृत होने की वजह से लोगों को काम नहीं मिला। वही दूसरी ओर नियमितीकरण की मांग को लेकर रोजगार सहायक 26 दिसम्बर से अनिश्चित कालीन आंदोलन पर है। ऐसे में श्रमिकों को आज भी रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है। आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रमिकों को अपने परिवार के पालन पोषण के लिए एक मात्र विकल्प पलायन ही नजर आ रहा है। ऐसे में वे ठेकेदारों के बहकावे में आकर पलायन करने को मजबूर हैं।
श्रमिक पंजीयन कर निभाई दी गई औपचारिकता
लाकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में शहरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूर घर वापस लौटे। हालांकि जिला प्रशासन के निर्देश पर श्रमिकों का पंजीयन कर उन्हें एक, दो माह निश्शुल्क राशन का वितरण किया गया, मगर माह गुजरने के साथ ही शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से अब उन्हें राशन का वितरण भी निश्शुल्क नहीं किया जा रहा है। हालांकि श्रमिक परिवारों द्वारा नये राशन कार्ड के लिए पंचायत सहित संबंधित कार्यालयों में आवेदन जमा किया गया है, मगर कई माह बाद भी अब उन्हें राशन कार्ड उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। ऐसे में राशन के लिए उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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