सुकमा में आदिवासी छात्रावास में पहली कक्षा की 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के घिनौना वारदात अब राजनीतिक रूप ले लिया है। भाजपा ने घेरते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था चौपट हो गई है। छत्तीसगढ़ में बेटियां सुरक्षित नहीं है । भाजपा ने मामले में रंजना साहू के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जाँच समिति भी बनाई है । तो कांग्रेस भाजपा शासन काल में हुए झलियामारी घटना याद दिला रही है और पीड़िता को न्याय दिलाने की बात कह रही है।
दरअसल सुकमा के एर्राबोर थाना क्षेत्र के अंतर्गत कन्या आवासीय विद्यालय में अध्यनरत पहली कक्षा की 6 साल की छात्रा दुष्कर्म के घिनौना वारदात हुआ दिन और वारदात 22 जुलाई की रात बच्ची स्कूल के छात्रावास में सोए थे तब हुआ। हलाकि अज्ञात आरोपी के खिलाफ पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत और पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज कर तलाश कर रही है | मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के एडिशनल एसपी गौरव मंडल की नेतृत्व में डीएसपी पारुल खंडेलवाल सहित 8 सदस्य समिति गठित की गई है और मामले की जाँच के बाद अधीक्षक के पति को गिरफ्तार किया है । मामले के उजागर के बाद जिला प्रशासन ने छात्रावास अधीक्षका और सहायक अधीक्षका निलंबित कर दिया गया है। वही सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि छात्रवास में छात्र के साथ दुष्कर्म हुआ वह बेहद निंदनीय है ।
पुलिस को जैसे जानकारी मिली तत्काल कार्यवाही की है | शासन की ओर से कार्यवाही भी की गई है ,पीड़िता को न्याय सरकार दिलाएगी। मंत्री रविन्द्र चौबे भाजपा जांच दल के आरोपों पर मंत्री ने किया पलटवार करते हुए भाजपा को झलियामारी घटना याद होनी चाहिए ,डॉ. रमन सिंह ने इस्तीफा तब क्यों नहीं दिया था ? भाजपा वाले उस घटना को भूल गए थे झलियामारी में कितनी बच्ची को साथ कुकृत्य हुआ था। सुकमा में घटित घटना पर सरकार ने तत्काल कार्रवाई की है।
चुनावी साल है और मामला आदिवासी बच्चे के साथ दुष्कर्म का है । साथ ही भाजपा प्रदर्शन भी कर रहे हैं | भाजपा बस्तर से सरगुजा तक सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने सुकमा के घटना को लेकर कहा सुकमा में बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना की निंदा की, दुखद पहलू हैं ।दूसरे राज्य में ऐसी घटना होती तो कांग्रेस इसे सर पर उठा लेती । वही भाजपा जांच दल द्वारा मौके का मुआयना को लेकर विधायक रंजना साहू ने बताया कि हमारी जांच दल द्वारा पीड़ित बच्ची से मिलने उनके माता-पिता से मिलने की कोशिश की लेकिन हमें उनसे मिलने नहीं दिया गया जब हम घटनास्थल पहुंचे वहां प्रबंधन की लापरवाही देखी गई 4 सीसीटीवी कैमरे लगे थे कोई भी चालू नहीं था । छात्रावास अधीक्षका के पति छात्रावास में रात रुकने की जानकारी मिली ,सरकार “हमर बेटी हमर अभिमान नारा चला रहे” दूसरी ओर प्रदेश में आदिवासी बच्चियों के साथ इस तरह से जघन्य वारदात को अंजाम दिया जा रहा है ,बेहद शर्मनाक है ।
छत्तीसगढ़ के आदिवासी हॉस्टल में हैवानियत के ऐसी कई घटना पहले भी हो चुके हैं | सवाल ये है कि आदिवासी छात्रावास में ऐसी घटना बार-बार क्यों हो रहे हैं ।सवाल यह भी है कि लगातार घटना के बाद भी व्यवस्था सुधारने में कोताही क्यों बरत रहे है ।
