रायगढ़ । नगर निगम में इन दिनों अधिकारी की मनमानी ओर दादागिरी का दौर जारी है। आज दोपहर इसका नजारा देखने को भी मिला जब आयुक्त आशुतोष पांडेय अचानक अपने अमले के साथ पहुँचे उसके बाद केवल अजय शर्मा की दुकान पर बुलडोजर चलवा दिया। दुकान का सामान बाहर फेंक कर कहा कलेक्टर का आदेश है। मजे की बात ये है कि इस इलाके में शनि मंदिर के बड़े कब्जे से लेकर आसपास के आधा दर्जन जगह बेजा कब्जे में थी लेकिन अजय शर्मा को ही बेदखल करने की कार्यवाही चली। इस तोडफ़ोड़ के दौरान पीडि़त परिवार ने एक बार नही बार-बार यह गुहार लगाई कि सामान हटाने के लिए दो दिन का समय दे दो लेकिन आयुक्त नही पसीजे और उन्होंने बुलडोजर के जरिए लाखों रुपए की संपत्ति को नुकसान पहुंचा दिया। जबकि शहर के हर चौक-चौराहों पर बेजा कब्जा का दौर जारी है। शनि मंदिर के पुराने कब्जे से लेकर नए कब्जे के अलावा गरीब मजदूरों के लिए बनाए गए शेड पर पूछे गए सवालों पर कोई जवाब नही दिया।
रायगढ़ के शहीद चौक पर एक परिवार को अपनी आजीविका चलाने के लिए इस जगह बीते 25 साल से अजय शर्मा ने नगर निगम कार्यालय में आवेदन देकर इस दुकान को किराए पर देने की गुहार लगाते आ रहा था। पर उसे बेजा कब्जा धारी बताकर देखते ही देखते दुकान पर बुलडोजर चलवाते हुए सडक़ पर ला दिया। पूरा परिवार बदले में जगह देने के साथ साथ सामान को हटाने के लिए समय की मांग करते हुए गुहार लगाई पर आयुक्त ने फिर से कलेक्टर के नाम का हवाला देते हुए अपनी कार्यवाही जारी रखी। इस बेजा कब्जा को टारगेट बनाकर तोड़ते समय पीडि़त परिवार ने आजीविका चलाने के लिए जगह की भी मांग की लेकिन आयुक्त ने उनके मजे लेते हुए यह कहा कि रैन बसेरा में जगह दे देता हूं और इसके अलावा उनके पास कहीं कोई जगह नही है, उनके इस जवाब से परिवार के लोग और आसपास के अन्य नागरिक सन्न रह गए। क्या कभी विस्थापन के दौरान कोई भी अधिकारी ऐसा जवाब देता है, लेकिन अपने ओहदे के नशे में चूर आयुक्त ने अपनी मनमानी जारी रखी।
शनिमंदिर सहित अन्य बेजाकब्जा के सवालों पर साधा मौन व्रत
जिस जगह निगम आयुक्त ने लगातार 6 घंटे से अधिक समय बैठकर अजय शर्मा को टारगेट बनाते हुए उसकी बरसो पुरानी दुकान ढहा दी। लेकिन आसपास के बेजाकब्जा के मामले में पूछे गए सवालों पर आयुक्त कोई जवाब नही दे पाए। इतना ही नही निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष पंकज कंकरवाल तथा वार्ड नं. 20 के भाजपा पार्षद ने भी बताया कि एक बार शनि मंदिर के बेजाकब्जा पर भी कार्रवाई करें। साथ ही साथ उन्होंने यह भी बताया कि शहीद चौक के आसपास सबसे बड़ा बेजा कब्जा शनि मंदिर के पुजारी का है जिन्होंने मजदूरों के लिए निगम द्वारा लाखों रुपए खर्च करके बनाए गए शेड सहित अन्य कीमती जमीनों पर मकान व मंदिर का निर्माण कर लिया है। पर आयुक्त ने केवल इतना ही कहा कि लिखित शिकायत दीजिए वे कार्रवाई करेंगे। चौकाने वाली बात यह है कि जब सामने एकमात्र अजय शर्मा की दुकान पर बुलडोजर फिरवाते हुए अन्य बेजा कब्धाधारियों को क्लीन चिट देते हुए सामने वालों से ही शिकायत मांग लेना यह बताता है कि निगम आयुक्त किस प्रकार इस कार्रवाई में व्यक्तिगत रूचि ले रहे हैं।
कलेक्टर ने कहा दूसरी जगह भी कार्रवाई होगी
शहीद चौक के बेजा कब्जा हटाने के मामले में निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने अपनी व्यक्तिगत रूचि के मामले में कलेक्टर भीम सिंह का नाम लिया और उन्होंने यह बताया कि कलेक्टर के आदेश पर यहां का पूरा कब्जा हटाने के लिए कहा गया है। जबकि संवाददाता ने जब कलेक्टर से बात की तो उन्होंने कहा कि उनकी बात आयुक्त से आज हुई ही नही है और वे कैसे उनका नाम लेकर ऐसा जवाब दे रहे हैं। आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने कलेक्टर भीम सिंह का नाम लेकर यह बता दिया कि वे अपने व्यक्तिगत रूचि वाले मामले में बेवजह कलेक्टर का नाम लेकर पूरा मामला उनके ऊपर डालना चाह रहे हैं।
बहरहाल देखना यह है कि अकेले शहीद चौक मामले में लगातार 6 घंटे से अधिक समय तक वहां बैठकर अजय शर्मा की दुकान को नेस्तानाबूत करने के बाद उनकी व्यक्तिगत रूचि कहां तक जाती है। शहर के अन्य बेजाकब्जा के मामले में भाजपा के जिलाध्यक्ष उमेश अग्रवाल ने जो आरोप लगाए थे वो सही साबित हो रहे हैं। चूंकि गरीब दुकानदारों की दुकान व घरों पर देखते ही देखते बुलडोजर फिरवाना और धन्ना सेठों को अभयदान देना उनकी नीति बन चुकी है। यहां यह बताना भी लाजमी होगा कि शहर के चुने हुए महापौर व सभापति सहित पार्षदों ने भी इस प्रकार की दादागिरी पर अधिकारियों के ऊपर लगाम लगाने के लिए कोई पहल नही की।
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