नरेश शर्मा
छत्तीसगढ़ आज अपना 24वां स्थापना दिवस मना रहा है। सन् 2000 में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल विहारी बाजपेयी के द्वारा बनाये गए छत्तीसगढ़ को अब पूरे 24 साल हो गए हैं और इन 24 सालों में छत्तीसगढ़ को जो मिलना था वह शायद अभी तक नही मिल पाया है। खनिज संपदा से भरपूर छत्तीसगढ़ में कोई कमी नही है और यहां हर जिले में कोयला, हीरा, आयरन के साथ-साथ कई खनिज प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं और इसी के चलते सरकार का खजाना हमेशा भरा रहता है। अगर हम 2000 से लेकर 24 सालों के सफर पर नजर डालें तो लगता है कि जिस प्रकार नया छत्तीसगढ़ शुरूआती दौर में रफ्तार पकड रहा था वह रफ्तार अब थम गई है।
जर्जर सड़कें और बढ़ती बेरोजगारी बन गई है पहचान
बीते 24 सालों में छत्तीसगढ़ को नया कुछ नही मिला न तो यहां एक जिले से दूसरे जिले को जोडने वाली सड़कें बद से बदतर स्थिति में है। हाईवे हो या नेशनल हाईवे उनकी भी स्थिति धीरे-धीरे और खराब हो रही है। कहा ये जाता है कि छत्तीसगढ़ की अपेक्षा ओडिसा की सड़कें ज्यादा बेहतर है और छत्तीसगढ़ में राजनीतिक दबाव के बाद भी इनकी हालत नही सुधर पा रही है। जनता इस बात को लेकर हैरान है कि अरबो के बजट के बाद भी आखिरकार क्या कारण है कि राजनीतिक दल के लोग विकास में सबसे ज्यादा सहयोग देने वाली सड़कों को नही सुधार पाती। अगर हम बात करें लगातार बढ़ते उद्योग संसाधनों की बावजूद इसके बेरोजगारी चारगुनी रफ्तार से बढ़ गई है। सिमित संसाधनों की दुहाई देते हुए सरकार के नुमाइंदे हर बार सरकार में आने से पहले इसे मुद्दा बनाते हैं और जैसे ही सरकार में आते हैं वे बेरोजगारों को भूल जाते हैं। आज छत्तीसगढ़ के उद्योगों में ज्यादातर यूपी बिहार के अलावा अन्य प्रांतों से आये लोग बड़ी संख्या में काम कर रहे हैं और छत्तीसगढ़ के युवा बेरोजगारों को नाम मात्र की जगह देकर तालियां बंटोरी जाती है। बढ़ती बेरोजगारी एक बड़ी समस्या बनते जा रही है और इसको लेकर युवा अब सड़कों पर उतरने की तैयारी में लगे हैं। पीएससी की भर्ती में हुए घोटाले हो या सब इंस्पेक्टर भर्ती घोटाले या शिक्षक भर्ती में हुई गडबड़ी सरकारों को कटघरे में खड़ा कर रही है।
राजनीतिक दलों के लोगों में नही है गंभीरता
2000 में जब छत्तीसगढ़ बना था तब मध्यप्रदेश से अलग होकर यहां ढाई साल के लिये प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अपनी कोशिश के जरिये छत्तीसगढ़ को तेजी से विकास के पद पर आगे ले जाने की कई प्लांनिग की थी और ढाई साल के भीतर कुछ काम भी हुए थे। इसके बाद के चुनाव में उनकी पार्टी की ऐसी हार हुई कि 15 सालों तक छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार रही जिसमें डाॅ रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का विकास तेजी से होनें के वादे किये गए पर हकीकत से कोसो दूर आज भी छत्तीसगढ़ जस का तस है जहां धूल उडाती सड़के, उद्योगों से निकलने वाली जहरीला धुआ के अलावा बेरोजगारी, भ्रष्टाचार चार गुनी रफ्तार से देखने को मिला। अब 24 साल का यह छत्तीसगढ़ जवान होनें के बाद विकास के लिये छटपटा रहा है लेकिन राजनीतिक दलों के लोगों द्वारा जनता के साथ केवल झूठे वादे करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते नजर आ रहे हैं और जनता कहराती हुई यह कहने से नही चूक रही कि वाकई 24 साल का छत्तीसगढ़ ऐसा है जहां सपने भी देखना दुभर हो गया है।
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