हाथी शावक की मौत के बाद दशकर्म, भजन-कीर्तन, पूजा अर्चना की और मृत्युभोज का हुआ आयोजन

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रायगढ़. रायगढ़ जिले में दो माह पहले हाथी शावक की बड़झरिया तालाब मंे डूबने से मौत हो गई थी। जिसके बाद ग्रामीणों ने शुद्धीकरण और वन व वन्यप्राणी सुरक्षित रहे इसके लिए पूजा-पाठ किया और भोजन को मृत्युभोज के रूप में ग्रहण किया।
बंगुरसिया सर्किल क्षेत्र मंे पिछले दिनों तकरीबन 32 हाथियों के झुंड ने डेरा डाल रखा था। जहां दिसबंर में एक शावक की बड़झरिया तालाब में डूबने से मौत हो गई थी, लेकिन हाथियों का कई दिनों तक आसपास के जंगल मंे डटा रहा। इसके अलावा धान मंडी में भी लगातार हाथियों ने धान की बोरियों को नुकसान किया। ऐसे में ग्रामीणों ने शुद्धिकरण और वन व वन्यप्राणी सुरक्षित रहे और जनहानि न हो, इसके लिए शनिवार को दशकर्म का आयोजन किया। बंगुरसिया व नवागांव के ग्रामीणों ने आपसी चंदा किया। जहां शनिवार को काफी संख्या में ग्रामीण जिस जगह पर हाथी शावक की मौत हुई थी, उस स्थान पर इक्ट्ठा हुए। इसके बाद बैगा व ग्रामीणों ने शिव-गणेश मंदिर में भजन-कीर्तन, पूजा अर्चना की और मृत्युभोज के रूप मंे भोजन ग्रहण किया।
विदित रहे कि दिसबंर माह में रात के समय करीब 32 हाथियों का झुंड बंगुरसिया स्थित बड़झरिया तालाब में नहाने पहुंचा था। इसी दौरान एक नन्हा शावक पानी में डूब गया। काफी देर तक शावक के बाहर न आने पर बाकी हाथियों ने उसे निकालने का प्रयास किया, लेकिन जब वह नहीं उठा, तो पूरा झुंड चिंघाड़ने लगा। हाथियों की आवाज सुनकर वन अमला और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। किसी तरह हाथियों को वहां से दूर किया गया। जिसके बाद शावक के मृत होने की पुष्टि हुई।

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Author: kakajee

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