प्रशासन की नाक के नीचे रेत का काला खेल, कुरकुट नदी को छलनी कर रहे माफिया, आखिर क्यों मौन है महकमा?

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​घरघोड़ा: घरघोड़ा में रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें न तो शासन का खौफ है और न ही प्रशासन की कार्रवाई का डर। घरघोड़ा क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली कुरकुट नदी इन दिनों माफियाओं की अवैध कमाई का जरिया बन चुकी है। दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक, धड़ल्ले से रेत की चोरी की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है।
​कहाँ है माइनिंग विभाग और पुलिस प्रशासन?
​क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि बिना “ऊपरी संरक्षण” के इतना बड़ा अवैध कारोबार संचालित होना नामुमकिन है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध रेत परिवहन की जानकारी होने के बावजूद माइनिंग विभाग और पुलिस अधीक्षक की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या शासन-प्रशासन के साये में ही यह लूट चल रही है?
​नदी का अस्तित्व खतरे में
​कुरकुट नदी से जिस तरह मशीनों के जरिए रेत निकाली जा रही है, उससे नदी का जलस्तर गिरने और प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। भारी वाहनों की आवाजाही से गांव की सड़कें बदहाल हो रही हैं, लेकिन माफियाओं के रसूख के आगे आम जनता बेबस है।
​प्रमुख सवाल जो जवाब मांगते हैं:
​जब खुलेआम रेत चोरी हो रही है, तो खनिज विभाग के अधिकारी निरीक्षण करने क्यों नहीं पहुँचते? ​जिले के पुलिस कप्तान (SP) इस मामले में सख्त रुख क्यों नहीं अपना रहे? ​क्या अवैध रेत से होने वाली कमाई में सफेदपोशों की भी हिस्सेदारी है?
​निष्कर्ष:
अगर समय रहते इस अवैध उत्खनन पर लगाम नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र का पर्यावरण पूरी तरह तबाह हो जाएगा। अब देखना यह है कि इस समाचार के बाद जिला प्रशासन जागता है या माफियाओं का यह ‘सिक्का’ यूँ ही चलता रहेगा।

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Author: kakajee

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