रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी लूट की वारदात सामने आई है। रायपुर और नवा रायपुर के बीच स्थित मंदिर हसौद क्षेत्र में मंगलवार रात बाइक सवार दो बदमाशों ने एक ठेकेदार के अकाउंटेंट से चाकू की नोक पर 10 लाख रुपये नकद लूट लिए। घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया, लेकिन वारदात के 48 घंटे बाद भी आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
जानकारी के अनुसार, ठेकेदार का अकाउंटेंट सागर डेहरिया समता कॉलोनी स्थित कार्यालय से 10 लाख रुपये नकद लेकर नवा रायपुर में भुगतान करने जा रहा था। जैसे ही वह सेरीखेड़ी से आगे मंदिर हसौद क्षेत्र में ललित महल के पास सुनसान सड़क पर पहुंचा, बाइक सवार दो अज्ञात बदमाशों ने उसे रोक लिया। आरोपियों ने उसकी गर्दन पर चाकू अड़ा दिया और रुपयों से भरा बैग छीनकर मौके से फरार हो गए।
CCTV में चेहरे और बाइक नंबर कैद, फिर भी गिरफ्तारी नहीं
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मामला दर्ज कर आसपास के CCTV फुटेज खंगालने शुरू किए। जांच में बदमाशों के चेहरे और इस्तेमाल की गई बाइक का नंबर भी सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए चार विशेष टीमें गठित की हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है।
कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार हो रही लूट की घटनाओं ने रायपुर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब CCTV फुटेज उपलब्ध हैं और बाइक की पहचान भी हो चुकी है, तो आखिर अपराधी पुलिस की पहुंच से बाहर कैसे हैं? स्थानीय मुखबिर तंत्र और गश्त व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों में दहशत, पुलिस गश्त पर नाराजगी
घटना के बाद मंदिर हसौद और आसपास के क्षेत्रों के लोगों में भय का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में नियमित पुलिस गश्त नहीं होती, जिसके कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। लोगों ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
बड़ा सवाल
10 लाख रुपये की लूट, CCTV में कैद चेहरे, बाइक नंबर की पहचान, चार पुलिस टीमें और 48 घंटे का समय—फिर भी आरोपी फरार। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पुलिस अपराधियों तक पहुंचने में अब तक नाकाम क्यों है? और क्या राजधानी क्षेत्र की सड़कों पर आम नागरिक सुरक्षित हैं?
फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड की जांच पर टिकी हुई है।
