‘कवच’ से संरक्षित हो रही भारतीय रेल की रफ्तार…“स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली से रेल संरक्षा को मिली नई मजबूती” “दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 2430 रूट किलोमीटर पर तेजी से हो रहा है कवच का विस्तार”

by Kakajee News

 

बिलासपुर, भारतीय रेल आधुनिक तकनीक के माध्यम से रेल संरक्षा को नए आयाम प्रदान कर रही है। यात्रियों संरक्षित, विश्वसनीय एवं निर्बाध रेल यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय रेल द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) प्रणाली “कवच” का चरणबद्ध विस्तार किया जा रहा है। यह प्रणाली ट्रेन संचालन के दौरान संभावित मानवीय त्रुटियों को न्यूनतम करते हुए दुर्घटनाओं की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रेल संरक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग का ही परिणाम है कि भारतीय रेल में परिणामी (Consequential) रेल दुर्घटनाओं की संख्या वर्ष 2014-15 में 135 से घटकर 2024-25 में 31 तथा वर्ष 2025-26 में केवल 16 रह गई है। संरक्षा अवसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए भारतीय रेल द्वारा संरक्षा मद में लगातार निवेश भी बढ़ाया जा रहा है।

क्या है ‘कवच’?
‘कवच’ भारतीय रेल के अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित विश्वस्तरीय SIL-4 प्रमाणित स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है। यह प्रणाली लोको पायलट को वास्तविक समय में सिग्नल, गति सीमा, लक्ष्य दूरी तथा मूवमेंट अथॉरिटी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराती है। यदि किसी कारणवश लोको पायलट निर्धारित गति सीमा का पालन नहीं करता अथवा खतरे वाले सिग्नल (SPAD) को पार करने की स्थिति बनती है, तो कवच स्वतः ब्रेक लगाकर ट्रेन को संरक्षित रोक देता है। घने कोहरे जैसी परिस्थितियों में भी यह प्रणाली संरक्षित संचालन सुनिश्चित करती है।

कवच कैसे करता है कार्य?
कवच प्रणाली ट्रैक पर स्थापित RFID टैग, यूएचएफ रेडियो संचार, स्टेशन इंटरलॉकिंग एवं ऑनबोर्ड उपकरणों के माध्यम से ट्रेन की स्थिति, गति एवं मार्ग की सतत निगरानी करती है। यह संरक्षित दूरी का निरंतर आकलन करते हुए आवश्यकता पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगाती है तथा संभावित दुर्घटनाओं को टालती है।

दुर्घटना रोकने में कवच की प्रमुख भूमिका
कवच निम्न परिस्थितियों में रेल सुरक्षा सुनिश्चित करता है—
• खतरे वाले सिग्नल (SPAD) को पार करने से पहले स्वतः ट्रेन रोकना।
• निर्धारित गति सीमा से अधिक गति होने पर स्वतः ब्रेक लगाना।
• आमने-सामने, पीछे से अथवा साइड से संभावित ट्रेन टक्कर को रोकना।
• आपात स्थिति में स्टॉप ऑन साइट (SoS) संदेश प्रसारित कर आसपास की ट्रेनों को स्वतः नियंत्रित करना।
• लेवल क्रॉसिंग के निकट स्वतः हॉर्न बजाना।
• स्थायी एवं अस्थायी गति प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करना।
• नेटवर्क मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से ट्रेनों की केंद्रीकृत रियल-टाइम निगरानी करना
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में तेजी से हो रहा है विस्तार
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के संपूर्ण 2430 रूट किलोमीटर नेटवर्क पर कवच प्रणाली लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। संचार अवसंरचना का विकास, ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने, संचार टावरों की स्थापना तथा लोकोमोटिवों में उपकरण फिटमेंट का कार्य निरंतर प्रगति पर है। अब तक 238 लोकोमोटिवों में कवच उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं।
बिलासपुर मंडल में बिलासपुर–रायगढ़ खंड पर कवच कमीशनिंग की दिशा में कार्य प्रगति पर है तथा बिलासपुर–चांपा खंड में फील्ड परीक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं। नागपुर मंडल में नागपुर–दुर्ग खंड पर SIL-4 कमीशनिंग हेतु साइट परीक्षण एवं लोको ट्रायल जारी हैं। इसी क्रम में 23 जुलाई 2026 को नागपुर रेल मंडल के कलमना–सालवा (25 किलोमीटर) रेलखंड में ब्रेकिंग मोड ऑन के साथ SIL-4 स्तर का कवच ट्रायल सफलतापूर्वक संपन्न किया गया, जिसमें सिग्नल रिस्पॉन्स, स्वचालित ब्रेकिंग, गति नियंत्रण तथा आपातकालीन (SOS) प्रणाली का सफल परीक्षण किया गया। रायपुर मंडल में दुर्ग–मांढर खंड पर भी कवच कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रगति पर है।
कवच प्रणाली भारतीय रेल की संरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करते हुए आधुनिक, संरक्षित एवं तकनीक आधारित रेल संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध हो रही है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में इसका चरणबद्ध विस्तार भविष्य में रेल परिचालन को और अधिक संरक्षित, विश्वसनीय तथा दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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