रायगढ़। रायगढ़ सहित छत्तीसगढ़ के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी एक सूत्रीय मांग को लेकर मंगलवार से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया है। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सामने बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टरों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की और सरकार से जल्द मांग पूरी करने की अपील की।
आंदोलन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में मिलने वाला स्टाइपेंड बेहद कम है, जबकि पड़ोसी राज्यों ओडिशा, पश्चिम बंगाल सहित कई अन्य राज्यों में एमबीबीएस इंटर्न को अधिक और सम्मानजनक स्टाइपेंड दिया जा रहा है। उनकी मांग है कि राज्य सरकार इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार रुपये करे।
इंटर्न डॉक्टरों ने बताया कि उनकी मांग को लेकर पहले भी कई बार शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखी जा चुकी है। इस संबंध में कलेक्टर के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया था। उस दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया था कि उनकी मांग पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इसी वजह से प्रदेशभर के इंटर्न डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
रायगढ़ जिले में करीब 62 इंटर्न डॉक्टर विभिन्न विभागों और स्वास्थ्य संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर जल्द निर्णय ले, ताकि वे पुनः अपनी ड्यूटी पर लौट सकें और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप एक वर्ष का अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम होता है। इंटर्न डॉक्टर अभी छात्र की श्रेणी में आते हैं और उन्हें प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन से मरीजों के उपचार और अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा।
डीन ने कहा कि इंटर्नशिप के दौरान प्रशिक्षण लेना आवश्यक है। आंदोलन के कारण इंटर्न डॉक्टर स्वयं का नुकसान कर रहे हैं, क्योंकि इस अवधि में वे प्रशिक्षण से वंचित रहेंगे और उन्हें स्टाइपेंड का लाभ भी नहीं मिल पाएगा। इस संबंध में उन्हें पहले ही अवगत करा दिया गया है।
