यूपी के बरेली में सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या करने वाले मामले में नया मोड़ आया है। जिस सुसाइड नोट को फाड़ने पर ग्रामीणों ने पुलिस को दौड़ा-दौड़ाकर पीट दिया था, वह सुसाइड नोट फर्जी निकला। पुलिस पड़ताल में पता चला है कि आत्महत्या करने वाले व्यक्ति ने सुसाइड नोट नहीं लिखा था। फर्जी सुसाइड नोट तैयार करने वाले लोगों के नाम मुकदमे में खोलने की तैयारी है। इसके अलावा पुलिस से मारपीट, बंधक बनाने वालों के फोटो और वीडियो के जरिए पहचान की जा रही है। उपद्रव करने वाले सभी लोगों के नाम मुकदमे में खोले जायेंगे।
मऊचंदपुर के रहने वाले शिशु पाल ने नौ अप्रैल को आंवला थाने में नाबालिग बेटी को अगवा करने के आरोप में गांव के बंटी, मुकेश और दिनेश के खिलाफ मुकदमा दर्र्ज कराया था। शिशुपाल ने चौकी इंचार्ज पर रिश्वत मांगने और उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुये फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या की सूचना पर चौकी इंचार्ज राम रतन, सिपाही मोनू, मुलायम सिंह वहां पहुंचे। गुस्साये गांव वालों ने उन्हें बंधक बना लिया। सीओ चमन सिंह चावड़ा, कोतवाल मनोज कुमार सिंह और पुलिस पर पथराव किया। इसमें दो सिपाही घायल हो गये थे। कोतवाल मनोज कुमार सिंह की ओर से घटना में 40-50 उपद्रवियों के खिलाफ बलवा, मारपीट, पथराव, बंधक बनाने, सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया था। वीडियो ग्राफी के आधार पर उपद्रवियों की शिनाख्त की जा रही है।
बेटी बरामदगी को लेकर दे दी जान, फिर भी नहीं ढूंढ पाई पुलिस
नौ अप्रैल को मुकदमा दर्ज होने के बाद सोमवार को हुये बवाल के बावजूद पुलिस अभी तक लड़की को बरामद नहीं कर पाई है। अपनी बेटी को बरामद करने की मांग को लेकर शिशुपाल ने अपनी जान दे दी थी। चार दिन बाद भी पुलिस लड़की का पता नहीं लगा पाई है।
एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल ने बताया वीडियो के जरिये उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। फर्जी सुसाइड नोट तैयार करने और बवाल कराने के पीछे साजिश थी। ऐसे लोगों के नाम मुकदमे में शामिल किये जा रहे हैं। सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। पुलिस की टीमें लड़की को बरामद करने में लगी हैं।
