रायगढ़। रायगढ़ निवासी आशुतोष उपाध्याय ने ढिमरापुर, रायगढ़ स्थित अपराजिता टीवीएस के विरुद्ध अपनी TVS Apache 200 मोटरसाइकिल की सर्विस एवं मरम्मत के दौरान गंभीर लापरवाही बरते जाने का आरोप लगाया है। श्री उपाध्याय के अनुसार, वाहन को अप्रैल 2026 में चेन-स्प्रोकेट बदलवाने के लिए उक्त शोरूम/सर्विस सेंटर में दिया गया था, जिसके लिए लगभग ₹5,500 का खर्च बताया गया था।
श्री उपाध्याय के अनुसार, नया चेन-स्प्रोकेट लगने के बाद वाहन से तेज एवं असामान्य आवाज आने लगी। इसकी शिकायत करने के बाद उन्हें कई बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने पड़े। उनका कहना है कि लगभग 7-8 बार वाहन दिखाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
इसके बाद श्री उपाध्याय ने संस्थान के संचालक भगवती प्रसाद अग्रवाल से मुलाकात की। उनके अनुसार, संचालक द्वारा समस्या ठीक कराने का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद भी वाहन पर दो बार अतिरिक्त कार्य कराया गया, लेकिन समस्या बनी रही। बाद में उन्हें वाहन दो दिन सर्विस सेंटर में छोड़ने के लिए कहा गया तथा फोन करके वाहन का परीक्षण करने के लिए बुलाया गया।
श्री उपाध्याय का आरोप है कि परीक्षण के दौरान वाहन अचानक बंद हो गया। इसके बाद दोबारा सर्विस सेंटर ले जाने पर वाहन की मरम्मत में लगभग ₹30,000 खर्च बताया गया। उन्होंने वाहन को मरम्मत के लिए सर्विस सेंटर में छोड़ दिया। उनके अनुसार, मई 2026 से अगस्त 2026 तक वाहन की समस्या का समाधान नहीं हो सका।
बैटरी बदलने का भी आरोप
श्री उपाध्याय के अनुसार, इस अवधि में उन्हें बताया गया कि उनकी मोटरसाइकिल की बैटरी खराब है और उन्हें एक अन्य बैटरी दी गई। बाद में जब वह बैटरी Amaron Service Centre लेकर गए तो कथित तौर पर वहां पता चला कि वह बैटरी किसी अन्य व्यक्ति की थी, जो कापु क्षेत्र का निवासी है और जिसके पास भी इसी प्रकार की मोटरसाइकिल है।
श्री उपाध्याय का कहना है कि इस घटनाक्रम से उन्हें अपनी मूल बैटरी के संबंध में गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ और उन्होंने सर्विस सेंटर में वाहन एवं उसके पार्ट्स की सुरक्षा तथा रखरखाव पर भी सवाल उठाए हैं।
28 अगस्त 2026 को वाहन परीक्षण के दौरान आग लगने की घटना
श्री उपाध्याय के अनुसार, लंबे समय तक वाहन ठीक न होने के बाद उन्हें 28 अगस्त 2026 को फोन करके बताया गया कि उनकी मोटरसाइकिल तैयार है और वह उसे लेने आ सकते हैं।
उनके अनुसार, सर्विस सेंटर पहुंचने पर उन्होंने वाहन स्टार्ट करने को कहा। वाहन को मिस्त्री द्वारा स्टार्ट किया गया, लेकिन मोटरसाइकिल में अत्यधिक मात्रा में पेट्रोल ओवरफ्लो होकर आसपास फैल गया और कुछ ही समय बाद वाहन बंद हो गया।
श्री उपाध्याय का आरोप है कि इसके बाद वाहन को दोबारा स्टार्ट/जांचने के प्रयास में मिस्त्री द्वारा स्पार्क प्लग निकालकर वाहन की बॉडी में बिना पेट्रोल सुखाये लापरवाही पूर्वक स्पार्क चेक किया गया। इसी दौरान वाहन में आग लग गई।
उनका आरोप है कि सर्विस एरिया के आसपास आग बुझाने के पर्याप्त एवं तत्काल उपलब्ध अग्निशमन साधन नहीं थे तथा फायर एक्सटिंग्विशर लाने में समय लगने के कारण आग तेजी से फैल गई और उनकी मोटरसाइकिल काफी अधिक जलकर क्षतिग्रस्त हो गई।
ग्राहक ने उठाए गंभीर सवाल
श्री उपाध्याय ने इस पूरे घटनाक्रम पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं—
• चेन-स्प्रोकेट बदलने के बाद उत्पन्न समस्या को कई बार शिकायत करने के बावजूद समय रहते ठीक क्यों नहीं किया गया?
• वाहन को कई महीनों तक सर्विस सेंटर में रखने के बाद भी उसकी समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?
• वाहन के परीक्षण के दौरान पेट्रोल का अत्यधिक रिसाव/ओवरफ्लो होने के बावजूद उसे सुरक्षित तरीके से क्यों नहीं संभाला गया?
• ज्वलनशील पेट्रोल के आसपास स्पार्क उत्पन्न करने वाली जांच किस सुरक्षा प्रक्रिया के तहत की गई?
• सर्विस एरिया में तत्काल उपयोग योग्य अग्निशमन व्यवस्था पर्याप्त रूप से उपलब्ध क्यों नहीं थी?
• ग्राहक की मोटरसाइकिल की बैटरी के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति की बैटरी मिलने की स्थिति कैसे उत्पन्न हुई?
• वाहन की सुरक्षा, पार्ट्स और ग्राहक की संपत्ति की जिम्मेदारी सर्विस सेंटर द्वारा किस प्रकार निभाई गई?
कानूनी कार्रवाई की तैयारी
श्री उपाध्याय का कहना है कि वह इस पूरे मामले में उपलब्ध जॉब कार्ड, बिल, सर्विस रिकॉर्ड, वाहन की तस्वीरें एवं वीडियो, बैटरी से संबंधित दस्तावेज, बातचीत तथा आग लगने की घटना से संबंधित अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रख रहे हैं।
उन्होंने संबंधित टीवीएस डीलर/सर्विस सेंटर से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करने की मांग की है।
श्री उपाध्याय का कहना है कि यदि मामले का उचित समाधान नहीं किया जाता है तो वे उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत उचित मंच तथा अन्य सक्षम वैधानिक/प्रशासनिक प्राधिकरणों के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने सहित उपलब्ध कानूनी उपायों का सहारा लेंगे।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को बिना जांच के दोषी ठहराना नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराना और एक ग्राहक के रूप में अपने अधिकारों एवं हुए नुकसान के संबंध में उचित समाधान प्राप्त करना है, तथा अन्य ग्राहकों के साथ ऐसा लापरवाही तथा धोखाधड़ी और उनका नुकसान ना हो इसके लिए जागरूक करना है ।



