रायगढ़। पिछले कई दिनों से पाठकों को यह बताना चाह रहा था कि रायगढ़ जिले में कैसे एक नया खेल बीते कई सालों से जारी है और पहले कभी इस मामले में एक्का-दुक्का कार्रवाई हो जाती थी, पर हम पुलिस रिकार्ड, प्रशासन के रिकार्ड के अलावा अखबारों के साथ-साथ टीवी के रिकार्ड खंगालेंगे तो पता चलेगा कि बीते पांच सालों से कोयले के मामले में हो रही हेराफेरी, बिल्टी, के नाम पर वारे न्यारे और लिंकेज कोयले के नाम पर धन्ना सेठ बन रहे तस्करों पर कोई कार्रवाई नही हुई है। इतना ही नही कुछ अखबार व अन्य टीवी चैनल के अलावा प्रशासन बीच-बीच में रेत तस्करों और फ्लाईएश मामलों में कार्रवाई करता रहा है, लेकिन कोयले का बड़ा कारोबार इससे अछूता है।
हम आपको बता दें कि रायगढ़ जिले में कथित कोयला तस्कर इतने शातिर है कि उनकी पकड़ प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर नेताओं के अलावा हर उस शख्स से है जो इस मामले में जरा सी भी लापरवाही को पकड़ लेता है और पकड़ने के बाद कोयला तस्कर को एक ही दिन में हजारों से लाखों रूपये का नुकसान होता है। सूत्रों की मानें तो कोयले के इस कारोबार में रायगढ़ जिले के ही कई ऐसे लोग शामिल है जो सफेद पोश तो हैं ही साथ ही साथ बड़े कारोबारी होनें के नाम पर बड़ा फायदा उठाते हुए इस काले कारोबार की भनक तक जनता को नही लगने दे रहे हैं, जबकि टीपी की आड में लिंकेज कोयले की आड में कोयले की अफरा-तफरी दिन व रात जारी है और सड़कों से होकर उद्योगों तक पहुंचने वाले इस कोयला परिवहन को रोकने तक कोई रूट चाट प्रशासन के पास नही है।
एक जानकारी के अनुसार प्रशासनिक हल्कों की कमी का फायदा उठाते हुए कुछ कारोबारी लिंकेज कोयले को बड़ी आसानी से बढ़े हुए दाम पर दूसरे उद्योगों में खपाते हुए रोजाना लाखों रूपये अपनी तिजोरी में भर रहे हैं और इसका हिस्सा कुछ लोगों के पास नियमानुसार पहुंचता भी है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि इस काले कारोबार में सबसे बड़ा खेल उस खिलाड़ी का है जिसने अपने सभी मामलों को सेट करते हुए बड़े आराम से इसको अंजाम देते आ रहा है। यहां यह बताना भी जरूरी है कि बीते कई सालों से कोयले के कारोबार में किसी भी प्रकार की कोई भी कार्रवाई तो दूर जांच तक नही हो पाना इनके लिये सबसे बड़ा प्लस पाइंट बना हुआ है। एक बड़ा कारण यह भी है कि कुछ सेटिंग की वजह से इस कारोबार में शामिल बड़े लोगों का नाम सामने लाने वाले लोगों के मुंह पर ताला लगा दिया गया है और इसकी चाबी खुद वह कारोबारी अपनी जेब में रखता है, चूंकि उसे मालूम है कि ताला खोलने के लिये जो चाबी उसकी जेब में है वह बड़े काम की चाबी है और समय-समय पर ताले को केवल तेल डालकर यह जताता है कि उसकी जंग नही लगने देना चाहता।
अधिकारिक सूत्रों के अनुसार हम आपको यह बता दें कि जिले के बड़े कोयला के तस्कर रायगढ़ शहर के अलावा आसपास ही रहते हैं कि और इनकी बड़ी पकड़ से दिन दुनी रात चौगनी की तर्ज पर कोयले की अवैध खेप उद्योगों तक पहुंच रही है और हमारा प्रशासनिक अधिकारियों से केवल इतना ही आग्रह है कि एकबार एक उद्योग से निकलने वाले कोयलो से भरी गाडियों के कागजात जांच तो कर ले कि आखिरकार वहां से निकलने वाला कोयला जा कहां रहा है और उसकी टीपी में क्या लिखा हुआ है। क्रमशः


