खरसिया में सरकारी राशन दुकान में 10.84 लाख रुपये के खाद्यान्न की कमी, दो संचालकों के खिलाफ FIR , हितग्राहियों को राशन नहीं देने की भी बात आई सामने

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रायगढ़ । रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखंड के ग्राम सोनबरसा स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान में खाद्यान्न वितरण में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। खाद्य विभाग की जांच में दुकान से 251.58 क्विंटल चावल और 3.20 क्विंटल नमक की कमी पाई गई। विभागीय गणना के अनुसार, कम पाए गए खाद्यान्न का मूल्य 10 लाख 84 हजार 813 रुपये आंका गया है। मामले में खाद्य निरीक्षक के आवेदन पर खरसिया पुलिस ने दुकान संचालन से जुड़े धनराज साहू और गोवर्धन दास महंत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

जांच में सामने आई खाद्यान्न की कमी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शासकीय उचित मूल्य दुकान सोनबरसा की जांच 22 सितंबर 2026 को खाद्य निरीक्षक द्वारा की गई थी। जांच के दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, दुकान विक्रेता और ग्रामीण हितग्राही मौजूद थे। जांच में सामने आया कि दुकान का संचालन ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव को आवंटित था, लेकिन अक्टूबर 2024 से खाद्यान्न भंडारण, प्राप्ति, वितरण और ई-पॉस मशीन संचालन सहित अन्य जिम्मेदारियां धनराज साहू और गोवर्धन दास महंत संभाल रहे थे।

जांच के दौरान ई-पॉस मशीन में चावल की उपलब्धता 48.29 क्विंटल प्रदर्शित हो रही थी, जबकि मौके पर भौतिक सत्यापन करने पर केवल 46 क्विंटल चावल मिला। विभागीय जांच रिपोर्ट में सितंबर और अक्टूबर 2026 के आवंटित खाद्यान्न को भी शामिल किया गया। गणना के अनुसार दुकान में कुल 297.58 क्विंटल चावल और 20.08 क्विंटल नमक उपलब्ध होना चाहिए था, लेकिन जांच के समय चावल 46 क्विंटल और नमक 16.88 क्विंटल पाया गया। इस तरह चावल की 251.58 क्विंटल और नमक की 3.20 क्विंटल कमी दर्ज की गई।

10.84 लाख रुपये का खाद्यान्न कम
खाद्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, कमी पाए गए चावल का मूल्य 10 लाख 81 हजार 40 रुपये तथा नमक का मूल्य 3,773 रुपये आंका गया। दोनों को मिलाकर कुल राशि 10 लाख 84 हजार 813 रुपये बताई गई है। विभाग ने इसे वसूली योग्य राशि माना है। हालांकि, मामले में अंतिम जिम्मेदारी और राशि की वसूली जांच एवं संबंधित प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

हितग्राहियों को राशन नहीं देने की बात
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सितंबर और अक्टूबर 2026 के लिए आवंटित खाद्यान्न का भंडारण हो चुका था, लेकिन संबंधित महीनों का राशन वितरण करने के लिए दुकान में पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध नहीं मिला। आवेदन में संचालकों की ओर से सितंबर और अक्टूबर का खाद्यान्न हितग्राहियों को नहीं दिए जाने की बात भी दर्ज है। इसके अलावा जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर माह की खाद्यान्न संबंधी राशि जमा नहीं किए जाने का उल्लेख करते हुए कुल 43,670 रुपये बकाया बताए गए हैं।

रिकॉर्ड और जरूरी सूचनाएं भी नहीं मिलीं
जांच के दौरान दुकान संचालक द्वारा संबंधित अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई। दुकान में शिकायत निवारण अधिकारी का संपर्क नंबर, अद्यतन मूल्य सूची, सतर्कता समिति के सदस्यों की सूची, कॉल सेंटर और राज्य खाद्य आयोग से संबंधित जानकारी भी प्रदर्शित नहीं मिली। इसके अलावा दुकान का भवन जर्जर हालत में पाया गया और खाद्यान्न के रखरखाव में भी खामियां दर्ज की गईं।

आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई
खाद्य निरीक्षक ने पूरे मामले में न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), खरसिया के संदर्भित प्रकरण और विभागीय जांच के आधार पर पुलिस में आवेदन दिया। प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 3(5) तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 और 7 के तहत अपराध पाए जाने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना में लिया है।

अब पुलिस जांच में खाद्यान्न की कमी, वितरण में अनियमितता और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। मामले में आरोपों की पुष्टि और दोष तय होना न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

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Author: kakajee

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