रायगढ़. रायगढ़ के कोतरा रोड़ क्षेत्र में स्थित दो डायग्नोस्टिक सेंटर में इन दिनों संचालकों की मनमानी चरम पर है। चूंकि कोरोना संक्रमण काल में मरीजों की तबियत बिगड़ने पर सिटी स्केन अनिवार्य कर दिया गया है और इस मार्ग में अनुपम तथा आलोक डायग्नोस्टिक सेंटर हैं जहां मरीजों के सिटी स्केन किए जाते हैं। मजे की बात यह है कि मात्र 50 मीटर की दूरी पर स्थित इन दोनों सेंटरों मंे सिटी स्केन का शुल्क अलग-अलग है। इतना ही नही एक सेंटर में 7 हजार 500 रूपए लिए जा रहे हैं तो दूसरे में लगभग 4 हजार 500 मामला यहीं खत्म नही होता। ये दोनों डायग्नोस्टिक सेंटर कल से सोशल मीडिया में सुर्खियों में बने हुए हैं चूंकि यहां एक महिला अपने रिश्तेदार का सिटी स्केन कराने पहुंचती है जहां उसे भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। उसने बकायदा सोशल मीडिया में अपनी गुहार लगाते हुए ऐसे संेटर के संचालकों पर कार्रवाई की मांग करते हुए लूट पर लगाम लगाने की बात भी की है। आप भी पढ़िये उस महिला ने सोशल मीडिया में क्या लिखा है।
ये है मीना अग्रवाल नाम की महिला का मैसेज….
कहाँ है इंसानियत कहाँ है मानवता आज जहाँ पूरा देश कोरोना की वैश्विक महामारी से जूझ रहा है ऐसे में हमारा रायगढ़ भी अछूता नही रह है,हालात बिल्कुल सही नही है,ऐसे परिस्थिति में जहाँ हम सबको एक जुट होकर जितना हो सके उतना लोगो की मदद करनी चाहिए,चाहे वो मदद तन,मन, या फिर धन से हो जिसकी जैसी छमता हो वैसे करनी चाहिए। मगर विडंबना देखो की इसके उलट कई लोगो द्वारा इस भयावह अवसर का भी लाभ उठाया जा रहा है,कल शाम हमारे बड़े भैया (पवन फरमानिया) जो कि कोरोना संक्रमित हो गए है उनका सिटी स्केन करवाने के लिए कोतरा रोड स्थित अनुपम डाइग्नोसिस लेकर गए थे,मरीज जो है उनको हम ऑक्सिजन लगाकर ही वहाँ ले गए थे, मगर वह 10 मिनट 10 मिनट बोलके 40 मिनट तक हमको बैठा दिया गया,जब हमने पूछा कि आपके यहां ऑक्सिजन की व्यवस्था है कि नही,तो उन्होंने कहा कि नही है,फिर हमने कहा कि आप हमको इतने देर से या बैठा करके रखे हो और आपके पास ऑक्सिजन भी नही है,अगर ये ऑक्सिजन भी खत्म हो गया तो,उन्होंने कहा कि आपको टेस्ट करवाना हो तो कराए,वरना ये आपके पैसे रखिये और जाइये,और तो और वहाँ सिटी स्केन का शुल्क 7800 था,वो तो हम जमा भी करा दिए थे,मगर जब हम वहाँ से निकलकर उसी के बाजू में आलोक केडिया के यहां गए तो वहाँ मात्र 10 मिनट में टेस्ट भी हो गया और आधे घंटे में हमे रिपोर्ट भी मिल गया,और उसका शुल्क 4000 लिया,अब देखिए कहाँ 7800 और कहाँ 4000,ये तो खुली लूट है ऐसे सेंटरों का तत्काल प्रशासन अपने संज्ञान में लेकर त्वरित कार्यवाही करके सील कर देना चाहिए,ऐसे सेंटरों को अब भी मुनाफाखोरी ही चाहिए,शर्म आनी चाहिये इन्हें,थू है ऐसे लोगो पर।
सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस मैसेज को लेकर हमने दोनों डाक्टरों से भी संपर्क करना चाहा लेकिन सुबह से ही इनके सेंटरों में उमड़ने वाली भीड़ के चलते बातचीत नही हो पाई। वहीं जिले के जिम्मेदार अधिकारी भी इस मामले में क्या कार्रवाई कर रहे हैं इसका पता नही चला है। देखना यह है कि अपने परिजनों के स्वास्थ्य लाभ के लिए भटकने वाले रिश्तेदारों को जब ऐसी स्थिति का सामना बार-बार करना पड़े तो यह अंदाजा लगा लेना चाहिए कि वे गंभीर मरीजों को कैसे बचा सकेंगे और खाली होते जेबों के अलावा मनमानी कर रहे सेंटर संचालकों से कैसे बचेंगे।
