कोरोना के बढ़ते संक्रमण को लेकर पूरे देश में अलग अलग तरीके के लोग अपनी अलग अलग राय दे कर अपनी सक्रियता बता रहे हैं।इनमें वो लोग भी है जो हमारे काम याने प्रेस जगत को कोस रहे हैं।लिखते हैं कि प्रेस ओर TV वाले खबरों के माध्यम से जागरूकता की बजाय लोगों में डर फैला रहे हैं।समझ से परे है ये।चूँकि आज हमारी टीम ने अपनी जान की परवाह किए बिना देश के घटिया सिस्टम की सच्चाई सामने रखी है कि कैसे देश में राजनीति करने वाले आम इंसान के स्वास्थ्य लाभ देने लायक भी नहीं है और कहते हैं कि देश 21 वी शताब्दी में जा रहा है ?
कुछ लोग हमें कोसने से पहले ये क्यों सोचते कि उनकी हर खबर, सक्रियता के अलावा उनके काम अखबारों में भी छपते है।खैर कहना आसान है और करना बहुत मुश्किल।आज के दौर में हमारे लिए सोचने का time किसके पास है? अधिकारी, नेताओं को खुश करने से ही सब अच्छा होता तो देश में चौथा स्तंभ का जिक्र नहीं किया जाता।हमनें इस लाइन में अपने साथियों के साथ लम्बा वक्त दिया है और दे रहे हैं।चाटुकारिता करते तो आज हम लोग आराम से घर में बैठकर इस कोरोना संक्रमण में सिस्टम के साथ कदम से कदम मिलाकर नही चलते।खामियों को सामने लाने से सभी जागते हैं तो क्यों हमें नकारात्मक सोच से कोसा जा रहा है।
233
previous post
