निजी जमीन पर बिना अनुमति कॉलोनी बन जाना तो सामान्य बात है, लेकिन सरकारी भूमि पर निजी लोग कॉलोनी काट दे आैर जिम्मेदार अधिकारी देखते रहें, इससे दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है? पर यह हुआ है। सरकारी जमीन की इस अफरा-तफरी में भू-माफिया ही नहीं, तीन गांवों की पंचायतों से लेकर प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों की भी उतनी ही मिलीभगत नजर आती है।
पटवारी से लेकर तहसीलदार तक शिकायतें होने के बावजूद इस पर न लगाम लगी और न कोई कार्रवाई हुई। लिहाजा पांच साल में बिहाड़िया, जामनिया और सनावदिया गांव की सीमाओं पर करीब 20 एकड़ जमीन पर आज कॉलोनी बस गई। यहां तक कि सरकारी जमीन पर निजी स्कूल भी बन गया है। इन तीनों गांवों का काकड़ आपस में मिलता है और यहां सरकारी जमीन का बड़ा क्षेत्र खाली था। इस खाली सरकारी जमीन पर भू-माफिया की नजर पड़ी और जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया। इसमें तीनों गांवों के कुछ लोग शामिल हैं। इन लोगों ने जमीन के बड़े हिस्से पर अलग-अलग जगह कब्जा कर इस पर प्लॉट काटना शुरू कर दिया। यह प्लॉट 150 रुपये से लेकर 500-600 रुपये के रेट में बेचे गए। नजूल की जमीन की सुरक्षा करना पटवारी की जिम्मेदारी होती है। साथ ही ग्राम पंचायत की अनुमति के बिना गांव की जमीन पर निर्माण नहीं हो सकते, लेकिन यह सब खेल चलता रहा। गांव के कुछ जागरूक लोगों की ओर से तहसीलदार से लेकर एसडीएम और कलेक्टर तक भी शिकायत की गई, लेकिन सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल नहीं रुका।
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