कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए उत्तराखंड को केरल की तुलना में दोगुनी मेहनत करनी होगी। राज्य के हेल्थ इंडीकेटर केरल की तुलना में अधिकांश मामलों में तकरीबन आधे हैं। ऐसे में बच्चों की सेहत सुधारने या केरल की बराबरी करने के लिए उत्तराखंड को पूरी ताकत से जुटना होगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका जता रहे हैं जिससे बच्चों के बड़े स्तर पर प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए सरकार बच्चों की सेहत में सुधार और इलाज की तैयारियों पर फोकस कर रही है। हेल्थ इंडीकेटर के अनुसार, राज्य में बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण के शिकार हैं और तमाम बच्चों का सामान्य टीकाकरण भी पूरा नहीं हो पा रहा है। राज्य सरकार द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भी इस ओर सरकार का ध्यान दिलाया है। कमेटी ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट में देश के साथ ही केरल के हेल्थ इंडीकेटर से उत्तराखंड की तुलना का चार्ट भी प्रस्तुत किया है। इसमें राज्य की स्थिति खराब नजर आ रही है। ऐसे में यदि तीसरी लहर आई तो राज्य को बच्चों को संक्रमण से बचाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी सकती है।
देश में सबसे बेहतर हेल्थ इंडीकेटर केरल के
कमेटी ने केरल के साथ उत्तराखंड के हेल्थ इंडीकेटर की तुलना इसलिए की है क्योंकि केरल में बच्चों के हेल्थ इंडीकेटर सबसे बेहतर हैं। इसीलिए सरकार से बच्चों के लिए टीकाकरण अभियान के साथ ही इम्युनिटी बूस्टर की सिफारिश की गई है। हालांकि देश के औसत आंकड़ों से राज्य बहुत पीछे नहीं है लेकिन इस मामले में सबसे बेहतर राज्य केरल से उत्तराखंड अधिकांश मामलों में पीछे है।
बच्चों को कोरोना की तीसरी लहर से बचाने के लिए राज्य को बहुत मेहनत करनी होगी। केरल की तुलना में राज्य के हेल्थ इंडीकेटर काफी खराब हैं ऐसे में यहां बच्चों को संक्रमण से बचाने और इलाज में बहुत मेहनत करनी होगी। बच्चों के टीकाकरण और इम्युनिटी बूस्टर देने की सिफारिश की गई है।
डॉ.डीएस रावत, बाल रोग विशेषज्ञ
