कोरोनाकाल में आम लोगों को राहत देने के लिए घोषित सरकारी योजनाएं दूसरी लहर के बाद भी पूरी नहीं हो पाई हैं। सरकार ने कोरोना काल में लोगों को राहत देने के लिए कई योजनाओं का ऐलान किया था। इसमें कुछ शासनादेश के पेंच फंसी हैं, तो कुछ विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गईं। इससे राहत की उम्मीद लगाए लोगों को करारा झटका लगा है। कर्मचारी संगठन भी ठगा महसूस कर रहे हैं।
फ्रंटलाइन वर्कर्स : 11 हजार प्रोत्साहन राशि नहीं मिली
कोरोना फ्रंटलाइन वर्कर्स को 11 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि अब तक नहीं मिली है। सबसे ज्यादा प्रभावित एनएचएम के कर्मचारी हैं। संगठन के राष्ट्रीय सचिव डॉ. संजय चौहान कहते हैं कि प्रोत्साहन राशि तो दूर सरकार ने एक हफ्ते के आंदोलन के बावजूद केंद्र से मिलने वाला बोनस भी जारी नहीं किया।
कोरोना से मौत: किसी को मुआवजा नहीं मिला
कोविड ड्यूटी कर रहे फ्रंट लाइन वर्कर्स की कोरोना से मौत पर मुआवजा राशि की बात कही गई थी। इसका फायदा केवल स्थाई सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों को ही मिला। उपनल अथवा एनएचएम के जरिए अस्पतालों में सेवाएं दे रहे कर्मियों के आश्रितों को आज तक राशि नहीं मिली।
आम आदमी : 20 किलो राशन भी नहीं पहुंचा पाए
गरीब तबके को राहत देने के लिए साढ़े सात किलो (चावल, गेहूं) का कोटा बढ़ाकर 20 किलो करने की सरकारी घोषणा हुई। यह राशन खाद्य आपूर्ति विभाग को जारी हो चुका है। मगर जिला नैनीताल समेत कई जिलों में यह राशन आज तक डीलरों ने पात्र लोगों को मुहैया नहीं कराया है।
