शरीर में दबे पांव घुसा कोरोना, संक्रमण का पता भी नहीं चला, खून की जांच ने खोला राज

by Kakajee News

नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सीरो सर्वे के तहत लिए जा रहे ब्लड सैंपल की जांच प्रारंभ कर दी गई है। हालांकि अभी कुछ सैंपल ही जांचे जा सके हैं जिनकी रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो चुका है कि शहर की आबादी में एक वर्ग ऐसा भी है जिनके शरीर में कोरोना का वायरस प्रवेश कर चुका था, पर लक्षण सामने न आने के कारण उन्हें बीमारी का पता नहीं चल पाया था। कोरोना के वायरस ने उन लोगों पर दबे पांव हमला किया और शरीर में ही अपना ठिकाना बना लिया। मेडिकल सूत्रों ने बताया कि कुछ ब्लड सैंपल की जांच में एंटीबॉडी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसका सीधा सा आशय यह है कि शहर के नागरिकों में कोरोना वायरस के प्रति एंटीबॉडी विकसित हो रही है। हालांकि मेडिकल के अधिकारियों ने कहा कि सीरो सर्वे की रिपोर्ट को लेकर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। 11 दिसंबर से 10 दिनों के लिए शुरू कोविड-19 सीरो सर्वे अभियान में स्वास्थ्य कर्मियों की 40 टीमों को खून के सैंपल लेने की जिम्मेदारी दी गई है। रोजाना एक हजार सैंपल कलेक्शन के लक्ष्य के साथ शुरू किए गए सर्वे में सोमवार रात तक 2000 सैंपल मेडिकल की लैब में पहुंच चुके थे। सैंपल की जांच प्रारंभ की गई, जिसकी रिपोर्ट नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेबल डिसीज दिल्ली भेजी जाएगी।
लक्ष्य से आधे सैंपल लिए जा सके :
सीरो सर्वे की शुरुआत से बनी सुस्ती पांचवे दिन भी नजर आई। रविवार अवकाश होने के कारण सर्वे नहीं हो पाया था परंतु चार दिन में चार हजार की तुलना में दो हजार सैंपल ही लिए जा सके। मेडिकल के अधिकारियों का कहना है कि सीरो सर्वे की मॉनीटरिंग आनलाइन की जा रही है। जिनके ब्लड सैंपल लिए जाते हैं उनका ब्यौरा निर्धारित एप पर आनलाइन भरना पड़ता है इसलिए रोजाना एक हजार सैंपलिंग नहीं हो पा रही है। हालांकि सर्वे का काम समय रहते पूरा कर लिया जाएगा।
हर आयु वर्ग के लोग शामिल :
सीरो सर्वे में हर सभी आयु वर्ग के लोगों को शामिल किया गया है। इनकी तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं जिनके 33-33 फीसद सैंपल लिए जाएंगे। 33 फीसद सैंपल 18 वर्ष से कम उम्र तथा इतने ही सैंपल 60 वर्ष से कम तथा 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए जाएंगे।

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