मौसम के कहर ने 10 मिनट के भीतर कुल्लू से लेकर लाहौल-स्पीति तक जमकर तबाही मचाई। मौसम के कहर से 14 लोगों की जान चली गई। मणिकर्ण घाटी के ब्रह्मगंगा नाले में दादा के सामने बहू और पोता बह गए। सुबह करीब छह बजे आई बाढ़ के समय ब्रह्मगंगा हाइड्रो प्रोजेक्ट में तैनात तकनीशियन अमित ने सीटियां बजाकर सो रहे लोगों को अलर्ट किया। इससे कई लोगों की जान बच गई। अमित की ड्यूटी सुबह सात बजे तक थी।
रोशन लाल के सामने चार साल का पोता निकुंज और उनकी बहू बाढ़ के सैलाब में बह गए। दादा ने बहू और पोते को बचाने के लिए हाथ भी दिया था, लेकिन हाथ पकड़ने से पहले तेज बहाव में समा गए। पार्वती घाटी में ब्रह्मगंगा नामक हाइड्रो प्रोजेक्ट में कार्यरत एक युवक भी बह गया है। सुबह की शिफ्ट के लिए घर से निकला था। युवक के पिता तीर्थ राम ने बताया कि उनके बेटे का पता नहीं चला है।
प्रोजेक्ट में तैनात प्रत्यक्षदर्शी तकनीशियन अमित ने कहा कि वह ब्रह्मगंगा नाले का रौद्र रूप देखकर हैरान थे। जब नाले का जलस्तर बढ़ा तो मात्र दस मिनट में सब कुछ तबाह हो गया। उन्होंने कहा कि सुबह के समय लोग अपने घरों में सोये थे। उन्होंने सीटी बजाने के साथ शोर मचाया। इससे लोग घर से सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। प्रोजेक्ट के मैनेजर सुरेश ने बताया कि प्रोजेक्ट में तैनात कर्मचारी ने सीटियां बजाकर लोगों को अलर्ट किया था। उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग ने कहा कि बादल फटने से चार लोग बह गए हैं।
ब्रह्मगंगा नाले में आई बाढ़ ने उजाड़ा हंसता खेलता परिवार
मणिकर्ण के ब्रह्मगंगा नाले में बुधवार को बादल फटने से आई बाढ़ ने एक हंसते खेलते परिवार को उजाड़ दिया। बाढ़ की चपेट में आने से ब्रह्मगंगा निवासी 25 साल की पूजा और उसका चार साल का बेटा काल का ग्रास बन गए। पल भर में देखते ही देखते दोनों मां और बेटा मौत के मुंह में समा गए। बादल फटने के बाद जब पानी मकान की तरफ आया तो सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए पूजा ने अपनी पीठ पर चार साल के बच्चे को बांध लिया था। लेकिन इस बीच पीछे से पानी में बहता हुआ एक लकड़ी का बड़ा ठेला आया और इससे वह गिरने से बह गई। इस दौरान उसके ससुर ने उसे बचाने की कोशिश की।
लेकिन वह पानी के तेज बहाव में बह गए। यहां माहौल चीख पुकार वाला हो गया था। बाढ़ के मंजर को देखकर सबके रौंगटें खड़े हो गए। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। नाले का बहाव दो मकानों व कैंपिंग साइट की तरफ मुड़ चुका था। हालांकि यहां पर नाले के रौद्र रूप को देखकर कुछ लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। लेकिन चार लोग इस हादसे का शिकार बन गए। गौर रहे कि इससे पहले वर्ष 2017 में भी ब्रह्मगंगा नाले में बाढ़ आई थी।
इस दौरान नाले पर बने दो पुल बह गए थे। लेकिन जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था। चार साल के बाद ब्रह्मगंगा नाले का एक बार फिर रौद्र रूप देखने को मिला। इस बार बादल फटने की घटना कभी न भूलने वाले जख्म दे गई है। मणिकर्ण पंचायत के उप प्रधान चेत राम ने कहा कि बादल फटने से चार लोगों की जान चली गई है। इनमें तीन स्थानीय लोग हैं। उन्होंने कहा कि बादल फटने का मंजर भयावह था।
