प्रायमरी स्कूल में लग रही हाई व हा. से. स्कूल की पाठशाला,9 वीं के छात्र सड़क किनारे घर की परछी में बैठकर करते हैं विद्या ग्रहण

by Kakajee News

रायगढ़। छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा एक ओर जहां छात्रों को पढ़ाई लिखाई में होनें वाली समस्या को देखते हुए पढाई तुंहर द्वार योजना की शुरूआत गई है। वहीं दूसरी ओर आज भी ग्रामीण अंचल के छात्रों को अपनी पढ़ाई लिखाई करने में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला घरघोड़ा ब्लाक के अंतर्गत आने वाले ग्राम छोटे गुमडा है। जहां हायर सेकेण्डरी के छात्रों को गांव में स्कूल भवन नही होनें की वजह से प्रायमरी, मिडिल के अतिरिक्त भवनों के अलावा घर के परछी में पढ़ाई करना मजबूरी बन चुका है। वहीं स्कूल शिक्षक नए भवन बनने में और तीन से चार महीने का वक्त लगने की बात कहते हैं।


कोरोना संक्रमण ने पूरे देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित किया है। कोरोनाकाल में लगने वाले लॉकडाउन से शिक्षा के क्षेत्र में इसका खासा असर पड़ा है, लॉकडाउन में जहां स्कूल, कालेज बंद रहने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। छात्रों की इन्हीं परेशानियों को देखते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा प्रदेश में पढ़ाई तुंहर द्वारा योजना की शुरूआत की गई है। इस योजना के तहत कोई भी छात्र की प्रभावित न हो और वह ऑनलाईन अपनी पढ़ाई कर सके इस बात का ध्यान रखा जा रहा है। कोरोना का ग्राफ कम होते होते स्कूल कालेज खुलने शुरू हो चुके हैं। इसके बावजूद रायगढ़ जिले के ग्रामीण अंचलों में शिक्षण व्यवस्था बद से बदतर है।


घरघोड़ा ब्लाक के छोटे गुमडा में एकमात्र प्रायमरी स्कूल भवन है। इस गांव के बच्चे पहले कभी 6 से 7 किलोमीटर दूर जंगल को पार कर टेण्डा नवापारा पढ़ाई करने जाते थे। चूंकि छोटे गुमडा और टेण्डा नवापारा के जंगलों में जंगली हाथियों का आवागमन रहता है। इसलिए यहां के ग्रामीणों के प्रयास से यहां सन 2013 में हाई स्कूल और 2016 में हायर सेकेण्डरी स्कूल खोलने की अनुमति मिली। तब से लेकर आज तक प्रायमरी स्कूल में ही जैसे तैसे हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल का संचालन ग्राम छोटे गुमडा में हो रहा है। हाई व हायर सेकेण्डरी स्कूल के लिए भवन का तो इस गांव में निर्माण हो रहा है मगर कई साल बीत जाने के बावजूद वह भवन आज तक अधूरा पड़ा है।


घरघोड़ा विकासखण्ड के अंतर्गत आने वाले ग्राम छोटे गुमडा के हायर सेकेण्डरी स्कूल में कक्षा 9वीं में 68 छात्र, 10वीं में 45 छात्र, 11 वीं में 71 एवं 12वीं में 43 छात्र है, कुल मिलाकर हायर सेकेण्डरी में 225 छात्र अध्ययनरत हैं। इन छात्रों के लिए इस स्कूल में 8 शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जबकि इस स्कूल में भृत्य की नियुक्ति ही नही की गई है, जिससे स्कूल शिक्षकों के सहारे ही स्कूल खुलता और बंद होता है।


स्कूल के प्रधान पाठक का कहना था कि शासन का निर्देश था कि अगर स्कूल भवन में जगह नही है तो किसी के निजी भवन में या फिर सार्वजनिक स्थलों पर स्कूली बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाए। यहां गांव से बाहर स्कूल बन रहा है, जो कि दो चार माह में बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। यहां हायर सेकेण्डरी स्कूल के लिए जगह नही होनें के कारण प्रायमरी व मिडिल स्कूल के अतिरिक्त भवन में ही हाई व हायर सेकेण्डरी की कक्षाएं लगाई जा रही है। चूंकि अतिरिक्त भवन की संख्या भी कम है इसलिए यहां 10वीं, 11वीं एवं 12वीं की कक्षाएं लगाई जा रही है। जबकि 9वीं के छात्रों को एक निजी भवन के बरामदे में सड़क किनारे बिठाकर कक्षाएं लगाई जा रही है। छात्रों ने बताया कि बारिश हो जाने पर बरामदे में चलने वाली उनकी पढ़ाई पर स्वयमेव ही विराम लग जाता है।


इस सत्र में जब से स्कूल खोलने की अनुमति मिली है तब से यहां हायर सेकेण्डरी स्कूल का संचालन किया जा रहा है। सड़क किनारे एक निजी भवन में जहां 9वीं कक्षा की क्लास लगाई जा रही है। उस 9वीं की कक्षा में 68 छात्र व छात्राएं अध्ययनरत है। जिनमें से अभी तकरीबन 50 छात्र रेगुलर आ रहे हैं। जिसको लेकर स्कूल के प्रभारी प्रधान पाठक सुशील बोहिदार का कहना था कि छात्रों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए अब सभी छात्रों को परछी में दूर दूर बैठाएंगे या फिर आधे आधे बच्चें को एक एक दिन बाद स्कूल बुलाकर पढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।

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