धरमजयगढ़ सामाजिक कार्यकर्ता सजल मधु को पुलिस ने बनाया हिस्ट्री सीटर गुंडा बदमाश?? पीड़ित पुलिस के खिलाफ पहुंचे हाईकोर्ट की शरण में,कोर्ट ने किया नोटिस जारी!

by Kakajee News

धरमजयगढ़ एक्सक्लूसिव न्यूज- धरमजयगढ़ जिला
रायगढ़ के बायसी कालोनी का बड़ा मामला प्रकाश में आया है,जहाँ एक तरफ ग्रामीण सजल मधु लगातार 2010 से ‘हाथी सबका साथी’और ‘भूमि बचाव संघर्ष समिति’ के बैनर तले पर्यावरण एवं किसानो के जमीन को बचाने को लेकर कार्य करते देखा गया है, उनके उत्कृष्ठ कार्य को देखते हुए सजल मधु को प्रतिष्ठित स्वयं सेवी संस्थान नई दिल्ली द्वारा 2017 में नीलकंठ सम्मान से नवाजा जा चुका है।

वहीं प्रस्तावित डीबी पॉवर और बेदान्ता ब्लॉकों के विरुद्ध, उद्योगों के खिलाफ प्रभावित किसानों के साथ मिल कर संविधान के तहत अपने हक के लिए उक्त दोनों ओपन कॉस्ट कोयला खदान के अगेंस्ट आंदोलन करते देखा गया है।


इन मायनो में इसे विडंबना ही कहेंगे की,धरमजयगढ़ पुलिस थाना में सजल मधु के खिलाफ तत्कालीन थाना प्रभारी एच. पी.सिंह सउनी.जी. पी.बंजारे द्वारा 2011 से 2012 के बीच 07 मामले दर्ज किया गया था जिस पर, अंधानुकरण करते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी सहित पुलिस सहित उस समय के अनुविभागीय अधिकारी धरमजयगढ़ द्वारा अनुशंसा करते हुए पुलिस अधीक्षक रायगढ़ को पत्र भेजते हुए,उसे हिस्ट्री सीटर गुंडा बदमाश निगरानी में रखने की बात कही।ततपश्चात तत्कालीन जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा आदेश पारित करते हुए हिस्ट्री सीटर गुंडा बदमाश में रखने का आदेश पारित किया गया था।

पीड़ित ने पुलिस पर 9 सालो से थाने बुलाकर प्रताड़ित करने का लगाया आरोप।

पीड़ित ग्रामीण सजल मधु ने बताया कि जब से उन्हें पुलिस द्वारा हिस्ट्री सीट गुंडा बदमाश के रिकार्ड में रक्खा गया,तब से लगातार लगभग 9 सालो से पुलिस थाना धरमजयगढ़ मे बुलाया जाता रहा,और घंटो थाने में बैठाये रखा जाता था,और पुलिस द्वारा अभद्र ब्यवहार करने कि बात कही,जिससे वे मानसिक रूप से आज पर्यन्त प्रताड़ित,एवम परेशान हैं।

शासन प्रशासन के अधिकारी को हाईकोर्ट से हुआ नोटिस जारी।
सजल मधु द्वारा सूचना के अधिकार के माध्यम से पुलिस द्वारा लगाए गए सभी केस की कापी को एकत्रित करते हुए, अपने ऊपर लगे आरोप के खिलाफ हाईकोर्ट में वकील रजनी सोरेन के माध्यम से 1अक्टूबर 2021को पुलिस के खिलाफ याचिका दायर किया गया,मामले को जस्टिस प्रीतम साहू द्वारा सुनते हुए 21 अक्टूबर 2021 को आदेश करते हुए नोटिस जारी किया गया जिसमें छत्तीसगढ़ मंत्रालय सचिव,जिला कलेक्टर रायगढ़,पुलिस अधीक्षक रायगढ़,धरमजयगढ़ एस.डी. एम.तहसीलदार धरमजयगढ़,पुलिस अनुविभागीय अधिकारी धरमजयगढ़,थाना प्रभारी धरमजयगढ़,तत्कालीन थाना प्रभारी एच. पी सिंह,और सउनी जी. पी. बंजारे को नोटिस जारी करते हुए तीन हफ्ते के अंदर समस्त जवाब तलब,जानकारी मंगाई गई है।

क्या कहते हैं पीड़ित सामाजिक कार्यकर्ता सजल मधु!
डी.बी. पॉवर के खिलाफ हम एक याचिका हाईकोर्ट में दायर किये थे,इस याचिकाकर्ता में डी. एस. मालिया सहित हम पांच याचिकाकर्ता थे।मामले को हाईकोर्ट से भोपाल एन.जी.टी. में ट्रांफर कर दिया गया था,जिसके पश्चात डी. एस.मालिया के साथ 4 याचिकाकर्ता ने भोपाल एन. जी.टी.जाने से इंकार कर दिया,जिसके बाद मैं स्यवं केस में लगातार उपस्तिथ होता रहा। इस बीच मुझे भी कई तरह का प्रलोभन दिया गया।


अन्त में जब मैं नही माना तो उद्योग वालों ने पुलिस के साथ मिल कर मेरे खिलाफ 7 झूठे केस दर्ज करते हुए मुझे बहुत सताया ।इन सभी सातों केस में कई खामियां हैं,जैसे की 107/16 के तीन केस जिसमे पुलिस द्वारा 2 केस लगाए गए,2 मामला 110 और 452 का केस है। इन दोनों मामलों में मेरी ग्रिफ्तारी हुई,न ही मुझे नोटिस दिया गय,वहीं एक मामला डी. बी.पावर के कर्मचारी सुदीप बिसवास द्वारा लगाया गया था,इस मामले में प्रथम श्रेणी धरमजयगढ़ द्वारा मुझे दोस मुक्त किया एवम सुदीप को सजा सुनाते हुए फाईन किया गया था,और एक केस चारुबाला के साथ था,जो कि कोर्ट में राजीनामा के साथ खत्म हुआ।इस तरह मेरा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन खनन परियोजना को अगर निरस्त नही किया होता, तो मुझ पर धरमजयगढ़ पुलिस द्वारा जिला बदर की कार्यवाही कर दिया गया होता,मुझे उम्मीद है कि हाईकोर्ट माननीय न्यायालय से मुझे सच्चा न्याय जरूर मिलेगा,और दोषी तत्कालीन पुलिस पर कार्यवाही निश्चित तौर पर होगी।

(वर्जन ,,,,,सजल मधु सामाजिक कार्यकर्ता☝️)

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