बिलासपुर। उदयपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत खरसुरा और खोन्दला गांव के ग्रामीण भालू की दहशत के साथ एक दूसरी समस्या का सामना कर रहे हैं। इस गांव के छोटे से मोहल्ले तेंदूटिकरापारा में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। सालों से अंधेरे में ही यहां के ग्रामीण अपना जीवन यापन कर रहे हैं, लेकिन बस्ती के नजदीक मादा भालू के दो बच्चे के बने रहने और वहां नर और मादा भालू के रोज रात को विचरण करने से इलाके के लोग शाम होते ही उसके हमले के खतरे को देखते हुए अपने घरों में कैद हो जाने के लिए मजबूर हैं।
ग्रामीण बिजली की मांग सालों से कर रहे हैं। ग्राम सभा से लेकर जन समस्या निवारण शिविर सभी जगह ग्रामीण बिजली के लिए आवेदन सौंप चुके हैं लेकिन कुछ घरों तक बिजली पहुंचाने की मांग अब तक अधूरी है। समस्या को लेकर ग्रामीणों ने फिर से विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता को ज्ञापन सौंपा है। इसमें बस्ती तक भालुओं के लगातार विचरण करने और उनसे जान माल के खतरे का हवाला भी दिया है। विद्युत विभाग का कहना है कि गिनती के दो-तीन घरों के लिए बिजली लाना खर्चीला है। वहां बिजली पहुंचाने में ट्रांसफार्मर से करीब 16 खंभे लगेंगे।
विभाग के पास बजट की कमी है और ऐसी कोई योजना नहीं है जिससे बस्ती तक बिजली लाई जा सके। गौरतलब है कि खरसुरा और खोन्दला गांव के बीच खेत के गड्ढे में 10 दिन पहले मादा भालू की दो बच्चे को देखा गया था। यह दोनों बच्चे खेत के गड्ढे में आज भी पड़े हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन दोनों बच्चों की देखरेख करने मादा और नर भालू रोज पास की पहाड़ी से वहां तक पहुंचते हैं। रात भर भालू इलाके में ही विचरण करते रहते हैं। तेंदूटिकरापारा बस्ती जहां बिजली नहीं है वह 100 मीटर की दूरी पर है। भालू रात में वहां तक पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार भालू दीमक की बांबी खोजते हुए घर तक पहुंच रहे हैं और वहां उनके पंजों के निशान रोज सुबह देखने को मिलते हैं। भालू की दहशत के कारण ग्रामीण शाम होते ही अपने अपने घरों के भीतर कैद हो जाते हैं ताकि किसी के साथ अनहोनी न हो जाए।
क्या कहते हैं ग्रामीण
खरसुरा गांव के तेंदूटिकरापारा निवासी धरम राम, रामनारायण, बिरछा राम, मंत्री पोर्ते, उरसेंगा राम जैसे ग्रामीण बिजली के बगैर सालों से रह रहे हैं। धरम राम एवं रामचरण ने बताया कि तेंदूटिकरापारा में जहां पर उनका घर है वहां तक ट्रांसफार्मर से बिजली लाने में 16 खंभे की जरूरत है। जब बिजली लाने की कवायद हुई तो विद्युत विभाग के किसी कर्मचारी ने उन्हें बताया कि 10 खंभे तक की व्यवस्था विभाग कर सकता है लेकिन बाकी छह खंभे के लिए उन्हें राशि देनी पड़ेगी। एक खंभे की कीमत तीन हजार रुपये बताई गई थी। यानी 18 हजार रुपए उन्हें देने पड़ेंगे। इतनी बड़ी राशि ग्रामीणों को पास नहीं होने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। विभाग बजट का रोना रो रहा है और इधर बस्ती के ग्रामीण भालू की दहशत के साथ जीवन जीने मजबूर है।
अधिकारियों को ग्रामीणों ने बताई समस्या
गांव के धरम राम, राम चरण सहित अन्य ग्रामीणों ने उदयपुर के कनिष्ठ अभियंता को इस समस्या से अवगत कराते हुए ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया है कि वर्षों से यह बस्ती अंधेरे में है, लेकिन फिलहाल उनके घरों के पास में भालू के दो बच्चे होने और नर और मादा भालुओं के रात में घर के आस-पास तक विचरण करने से जानमाल के नुकसान की आशंका है। इसको देखते हुए तत्काल बस्ती तक बिजली की व्यवस्था की जाए। ग्रामीणों ने इस समस्या से वहां के एसडीएम प्रदीप साहू को भी अवगत कराया। एसडीएम ने तत्काल इस मामले में इलाके के सहायक अभियंता को बिजली की व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया। अब ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि भालुओं के खतरे को देखते हुए उनके मोहल्ले तक आज नहीं तो कल बिजली आ जाएगी।
उदयपुर विकासखंड की उस बस्ती में बिजली नहीं पहुंचने की जानकारी मुझे भी मिली है। उस मोहल्ले तक बिजली विस्तार का काम बजट की कमी के कारण नहीं हो पा रहा है। पिछली जो योजनाएं थी वह बंद है और ना चाहते हुए भी हम अभी फिलहाल बिजली विस्तार का काम नहीं करा पा रहे हैं। लेकिन भालू के खतरे को देखते हुए मैंने तत्काल सहायक अभियंता को वहां अस्थाई रूप से बिजली कनेक्शन करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ग्रामीण अंधेरे में ना रहें।
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