कोरोना काल में मैरिटल रेप के मामले बढ़े, आठ महीने में सामने आए सैकड़ों केस

by Kakajee News

गोरखपुर के मोहद्दीपुर निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सवा साल पहले शादी हुई। पत्नी एमबीए है। कोरोना के कारण इंजीनियर वर्क फ्रॉम होम में है। वह टाइम पास करने के लिए अश्लील वीडियो व साहित्य पढ़ने लगा। उसकी पत्नी से अपेक्षाएं बढ़ती गईं। इसने उनके वैवाहिक जीवन में जहर घोल दिया। नौबत तलाक तक पहुंच गई। इस समय दोनों की काउंसलिंग चल रही है। इसी तरह साहबगंज के एक बड़े व्यापारी के बेटे का भी वैवाहिक जीवन एक साल के अंदर ही बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गया है।
यह दो मामले महज बानगी हैं। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) के मनोविज्ञान विभाग और आशा ज्योति केंद्र तक आठ माह में करीब दो सौ मामले मैरिटल रेप के पहुंच चुके हैं जबकि पूर्व के वर्षों में इनकी संख्या इक्का-दुक्का रहती थी। विश्वविद्यालय की मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. अनुभूति दुबे बताती हैं कि कोरोना काल ने नवविवाहितों के दाम्पत्य जीवन को जबरदस्त प्रभावित किया है। लॉकडाउन के दौरान दिनभर घर और कमरे में बंद रहने के कारण उनके जेहन में नकारात्मक भाव आने लगे। इस दौरान पुरुषों में अश्लील वीडियो और साहित्य देखकर समय काटने का शगल बढ़ा तो इसके दुष्प्रभाव सामने आने लगे। मैरिटल रेप के मामले बढ़ गए। प्रो. दुबे बताती हैं कि 145 परिवार उनके संपर्क में है। काउंसलिंग कर इन रिश्तों को बचाने की कोशिश चल रही है।


आशा ज्योति केंद्र पर भी काउंसलिंग
आशा ज्योति केन्द्र पर भी मैरिटल रेप के तीन दर्जन से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। इन मामलों की काउंसलिंग वहां की काउंसलर ज्योति गुप्ता कर रही हैं।
महिला आयोग तक पहुंच रहे मामले
मैरिटल रेप के मामले महिला आयोग तक पहुंचने लगे हैं। इन्हीं मामलों के संबंध में पिछले दिनों विश्वविद्यालय पहुंचीं राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य चंद्रमुखी देवी ने शिक्षकों के साथ बैठक भी की। उन्होंने कहा मनोविज्ञान विभाग को इसके लिए काउंसलिंग का नेटवर्क और बड़ा करना चाहिए। कोरोना में घर पर हिंसा के मामले कई गुना बढ़े हैं। सबसे ज्यादा यौन हिंसा बढ़ी है।
शादी के बाद दंपति के झगड़े बढ़ गए हैं। इसकी वजह मैरिटल रेप है। नव विवाहिताओं को उन मानसिक यातनाओं को सहना पड़ रहा है जिनका उन्हें अहसास नहीं था। इससे वह चिड़चिड़ी हो रही हैं। पति की हरकतों की खीज वह परिवार के दूसरे सदस्यों पर निकालती है। इससे घरेलू कलह बढ़ रही है।
प्रो. अनुभूति दूबे, विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान
लॉकडाउन में पति पूरे समय घर पर रहे हैं। इस समय मैरिटल रेप के केस बहुत बढ़े हैं। दिन भर खाने से लेकर हर मांग पत्नी को पूरी करनी पड़ रही हैं। साथ ही दिन-रात पति की संतुष्टि का भी ध्यान रखना पड़ा है।
चन्द्रमुखी देवी, सदस्य, राष्ट्रीय महिला आयोग
एक और दुष्प्रभाव-बच्चों से बिगड़ रहे अभिभावकों के संबंध
कोरोना काल ने कई नई समस्याओं को जन्म दिया है। लॉकडाउन के कारण लंबे समय तक अभिभावक घर पर रह रहे हैं। बच्चे भी घर पर थे। लंबे समय से वर्क फ्रॉम होम ने बच्चों और अभिभावक के बीच में नई दीवार खड़ी कर दी है। बच्चों को अपनी स्वतंत्रता में खलल का अहसास हो रहा है। लगातार अभिभावक की मौजूदगी के दबाव में बच्चे असहज हो रहे हैं। वह चिड़चिड़े हो रहे हैं। उनमें गुस्सा बढ़ रहा है। ऐसे 25 बच्चों की काउंसलिंग विश्वविद्यालय की टीम कर रही है। इसके साथ ही टीम बच्चों के अभिभावकों की भी काउंसलिंग कर रही है।

Related Posts

Leave a Comment