रायगढ़। रायगढ़ जिले में एक बार फिर से जंगली हाथियों की दस्तक हो चुकी है और इस बार जंगली हाथियों की संख्या एक दर्जन से भी ज्यादा है और वे रायगढ़ जिला मुख्यालय से मात्र 24 किलोमीटर दूर अमलीडीह व सामारूमा इलाके में पहुंच गए हैं। इन जंगली हाथियों की अचानक धमक की जानकारी ग्रामीणों ने दी है और जबकि वन विभाग का पूरा अमला आगामी दिनों मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आगमन को लेकर तैयारियांे में मीटिग-मीटिंग खेल रहा है और हाथी प्रभावित क्षेत्र के लोग एक बार फिर से रतजगा करके अपनी रात गुजारने पर मजबूर हो जाएंगे।
यहां यह बताना लाजमी होगा कि छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला हाथी प्रभावित होनें के चलते सबसे ज्यादा इनके आतंक से जूझ रहा है चूंकि जिले में रायगढ़ वन मंडल व धरमजयगढ़ वन मंडल आते हैं और इन दो जगह महीनों में दो बार हाथियों तथा मानव के बीच द्वंद्व होनें के चलते कभी हाथी की मौत तो कभी जंगली हाथियों के हमले से ग्रामीणों की मौत अखबारों की सुर्खियां बन चुकी है। बावजूद इसके सरकार के पास इस आतंक से निपटने के लिये अभी तक कोई ठोस योजना नही बनी है।
रायगढ़ जिले के साथ-साथ प्रदेश के कई जिलों में एक लंबे अर्से से जंगली हाथियों का आतंक जारी है। जंगलों में रहने वाले ये गजराज जंगलों से निकलकर रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर किसानों के घरों व फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस दौरान अगर इन जंगली हाथियों का किसी भी व्यक्ति का सामना हो जाए तो उसकी मौत निश्चित हो जाती है। जबकि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सावधानी के बोर्ड केवल सड़कों तक ही सिमित है और लंबे समय से इनको खदेडने तथा इनके आतंक से निपटने के लिये वन विभाग के पास पुराने संसाधनों के अलावा कुछ नही है।
कभी जंगली हाथी गांव में अगर घुस जाते हैं तो वन अमला उनके आतंक के चलते वहां पहुंचता ही नही पहुंचता तब है जब हाथी अपना काम करके निकल जाते हैं। स्थिति यह है कि आज भी अकेले रायगढ़ वन मंडल और धरमजयगढ़ वन मंडल में दर्जनो ऐसे गांव है जहां आज भी जंगली हाथियों की दहशत इस कदर है कि शाम ढलते ही गांव में अंदर व बाहर सन्नाटा पसर जाता है।
क्या है हाथी प्रभावित मार्गो की स्थिति
जंगली हाथी प्रभावित इलाकों में कई बार ऐसे भी नजारे सामने आते हैं जब गजराज सड़कों पर आ जाते हैं और घंटो तक उस मार्ग में वाहनों के पहिये थम जाते हैं। इनमें रायगढ़ घरघोड़ा मार्ग के ग्राम अमलीडीह, सामारूमा, के अलावा संबलपुरी बंगुरसिया, छाल, हाथी सर्वाधिक हाथी प्रभावित मार्ग हैं और यहां सड़क पर बोर्ड वन विभाग ने जनता को सावधान रहने के लिये लगाये जरूर है मगर इससे पहले कोई पहल वन विभाग की नही होती। हाथी इलाके में पहुंचने के बाद ग्रामीण रामभरोसे ही रहते हैं लोग।
आज फिर पहुंचे एक दर्जन से अधिक जंगली हाथी
शुक्रवार की सुबह रायगढ़ जिला मुख्यालय से महज 24 किलोमीटर दूर तमनार वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सामारूमा में फिर से जंगली हाथियों का झुंड सड़क मार्ग से दूसरे गांव में घुसते हुए देखा। इसकी जानकारी हमें क्षेत्र के लोगों ने दी और जब हमने जिले की वनमंडलाधिकारी को फोन किया तो हमेशा की तरह उनका फोन लगा ही नही इसे बाद हमने क्षेत्र के वन परिक्षेत्र अधिकारी से फोन पर जानकारी मांगी तो उन्होंने टका सा जवाब दिया कि वे मुख्यमंत्री आगमन की तैयारियों को लेकर डीएफओ मैडम के साथ मीटिंग में है उसके बाद उन्होने फोन काट दिया। इससे यह बात साफ हो जाती है कि जंगली हाथियों को लेकर हमारे जिले का जंगल विभाग कितना गंभीर है। ग्रामीणों हमे बताया कि लंबे समय बाद जंगली हाथियों का बडा दल अपने कई शावकों के साथ ग्राम अमलीडीह, सामारूमा के आसपास भटक रहा है जिससे क्षेत्र के लोग दहशत में है।
