दो तरह की कोरोना वैक्सीन को भारत में मंजूरी मिलने के बाद जहां आम जनता ने राहत की सांस ली है, वहीं शेयर बाजार में भी भारी उछाल देखने को मिला है। सोमवार को बाजार खुलते ही Sensex में करीब 200 अंकों की तेजी रही और यह पहली बार 48,000 के स्तर पर ऊपर चला गया। इस बीच, कोरोना वैक्सीन के साथ भारत पूरी तरह तैयार है। संयुक्त राष्ट्र समेत तमाम देशों ने इन प्रयासों की तारीफ की है, लेकिन भारत का विपक्ष अलग ही राग आलापे हुए है। जैसे ही वैक्सीन का अनुमति मिली और पीएम मोदी ने वैज्ञानिकों को बधाई दी, समाजवाजी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे भाजपाई वैक्सीन बताते हुए कह दिया कि वे टीका नहीं लगवाएंगे। अन्य विपक्षी दलों ने भी अखिलेश का समर्थन किया। सच्चाई यह है कि भारत में जिन दो वैक्सिन को अनुमति दी गई है, वो पूरी तरह सुरक्षित है। सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए टीकाकरण की मंजूरी की गई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (ऐम्स) के निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि ये वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और भ्रम फैलाने वाले लोग पूरी गलत हैं।
पूरी तरह सुरक्षित है भारत की कोरोना वैक्सीन
गुलेरिया के मुताबिक, जब हम किसी वैक्सीन पर विचार करते हैं, तो सुरक्षा सर्वोपरि रहती है। इसलिए वैक्सीन विभिन्न चरणों के परीक्षण से गुजरती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह सुरक्षित है। इसके बाद ही मानव पर परीक्षण शुरू होता है।
सभी तरह के नतीजों की समीक्षा की जाती है और इसके बाद ही मंजूरी मिलती है। इसलिए वैक्सीन को लेकर किसी तरह की गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।
वैक्सीन विवाद में अलग-थलग पड़ेअखिलेश
कोरोना वैक्सीन को भाजपा की राजनीतिक वैक्सीन बताकर इसे लगवाने से इनकार करने वाले अखिलेश यादव अब अलग-थलग पड़ते दिख रहे हैं। बसपा सु्प्रीमो के अलावा पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर व शिवपाल यादव ने भी टीके के लिए भारतीय विज्ञानियों को बधाई देने के साथ गरीबों का मुफ्त टीकाकरण किए जाने की पैरोकारी की। चौतरफा विवादों में घिरे में अखिलेश यादव सफाई देते नजर आए। ताजा ट्वटी में उन्होंने टीकाकरण को सजावटी-दिखावटी इवेंट न समझने और पुख्ता इंतजाम के साथ आरंभ करने की सलाह दी। साथ ही गरीबों के टीकाकरण की निश्चित तिथि घोषित करने की मांग भी की। हालांकि उनकी पार्टी का अब भी कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने काफी सोच समझकर वैक्सीन को लेकर बयान दिया है। हम लोगों ने फिलहाल तब तक वैक्सीन न लगवाने का निर्णय लिया है, जब तक वैक्सीन को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर मान्यता नहीं मिल जाती है।
