जंगली हाथियों ने मक्के की खेत में ऐसा मचाया उत्पात कि किसान के आंखों मे आ गए आंसु, क्या कहा किसान ने…….पढिये पूरी खबर

by Kakajee News

रायगढ़। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र में पिछले दो दशकों से यहां जंगली हाथियों का आतंक व्याप्त है। जंगली हाथियों ने यहां स्थाई डेरा जमा लिया है। जंगली हाथियों की मौजूदगी से यहां के रहवासियों को जहां कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है वहीं इस क्षेत्र में फसल नुकसान की घटना बात आम हो चली है। बीती रात जंगली हाथियों के एक दल ने एक किसान के खेत में जमकर उत्पात मचाया, आज सुबह जब किसान अपने खेत पहुंचा और वहां का नजारा देखकर उसके आंखों में आंसू आ गए और किसान सिसक-सिसक कर रोने लगा।

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार धरमजयगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम सागरपुर में बीती रात जंगली हाथियों ने दल जमकर उत्पात मचाया। जंगली हाथियों के एक दल ने क्षेत्र के किसान दयाल के मक्के की फसल को बुरी तरह तहस-नहस कर डाला। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद आज सुबह किसान जब अपने खेत पहुंचा वो वहां का नजारा देखकर वह रो पड़ा।

किसान ने रोते हुए बताया कि काफी रकम खर्च करने के बाद वह अपने खेत में मक्के की फसल लगाया था। दिन रात काफी मेहनत करते हुए फसल को उस मुकाम तक पहुंचाया था जब उसमें फल लगने ही वाले थे। लेकिन बीती रात जंगली हाथियों के द्वारा उसके फसल को पूरी तरह चैपट कर दिये जाने की वजह से उसके आर्थिक स्थिति पर इसका खासा असर पडेगा चूंकि किसान ने जमा पूंजी खर्च अपने खेत में मक्के की फसल लगाया था ताकि फसल पकने के बाद उसे बाजारों मंे बेचकर वह अपनी आजीविका के लिये कुछ पैसे कमा सके। मगर फसल पकने से पहले ही जंगली हाथियों ने उसे पूरी तरह चैपट कर दिया।

धरमजयगढ़ क्षेत्र में एक लंबे अर्से से जंगली हाथियों ने यहां डेरा जमाते हुए आए दिन उत्पात मचाते हुए अपनी मौजूदगी से क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल निर्मित करते आ रहे हैं। जंगली हाथियों के आतंक से जहां क्षेत्र के स्कूल छात्रों में स्कूल आने जाने में डर बना रहता है। दिन हो या रात कभी यहां जंगली हाथी जंगलों से निकलकर रिहायशी क्षेत्र में घुसकर जमकर तबाही मचाकर वापस जंगलों में लौट जाते हैं।

हाथी प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को 24 घंटों जान माल का डरा बना रहता है। फसल नुकसान की घटना को आम बात हो गई है। हाथी उत्पात के बाद किसानों को जो मुआवजा दिया जाता है वह किसानों के जख्मों पर मरहम भरने के सामान है।

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