रायगढ़. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने आज धरमजयगढ़ में पत्रकारों से चर्चा के दौरान छत्तीसगढ़ में हाथियों के बढ़ते आतंक व हाथियों व मानव के बीच बढ़ते द्वंद्व को लेकर पूछे गए सवालों पर कहा कि सन 2000 में छत्तीसगढ़ में जंगली हाथियों का आगमन हुआ था और पहले की अपेक्षा इनकी संख्या में काफी ज्यादा इजाफा है और पड़ोसी प्रांत ओडिसा, झारखण्ड से अब भी लगातार जंगली हाथियों का आगमन जारी है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जंगली हाथियों का दल सरगुजा, बिलासपुर संभाग, बलौद, रायपुर के अलावा अन्य जिलों में भी लगातार ये जंगली हाथियों का आतंक मचाते हुए महाराष्ट्र सीमा तक पहुंच गए हैं। हाथी और मानव के बीच बढ़ते द्वंद्व के संबंध में मुख्यमंत्री भूपेश बधेल का कहना था कि विभाग को इस दिशा में जन जागरण अभियान लगातार चलाया जा रहा है। वहीं जंगली हाथियों के आतंक को रोकने यहां बादलखोल, लेमरू प्रोजेक्ट बनाया।
मुख्यमंत्री ने हाथियों के गांव की तरफ आने का कारण बताते हुए कहा कि गर्मी के दिनों में पानी की तलाश में आते है या फिर महुआ या कटहल के सीजन में हाथी गांव की तरफ पहुंचते हैं। यदि पर्याप्त मात्रा में जंगलों में पानी और उसकी भोजन की व्यवस्था हो जाए तो वे गांव की तरफ नही आयेंगे। इस दिशा में हमारी सरकार ने नरवा प्रोजेक्ट लागू किया है। उससे काफी हद तक पानी की समस्या हल हो रही है। उन्होने अचानकमार का उदाहरणदेते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट से पर्याप्त मात्रा में जंगलों के भीतर पानी उपलब्ध होनें के बाद हाथी जंगल से बाहर नही आते।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में हाथी मानव द्वंद के विषय मे भूपेश बघेल ने कहा कि इसको रोकने के लिए जंगलो में नरूवा के संरक्षण करने का निर्देश दिया गया है ताकि पानी की कमी से हाथी व अन्य जानवर गांव की ओर न आये इसके साथ ही जंगलो में बांस, बरगद, केला जैसे पेड़ लगाने के भी निर्देश दिया गया है ताकि जंगल मे ही हाथियों के भोजन की व्यवस्था हो सके।
