कोनी, सेन्दरी,कछार लोफंदी और घुटकू में रेत का अवैध कारोबार करने वाले धनपिशाचों को, अपना मितान-महाप्रसाद बना लिया है, खनिज अधिकारियों ने
(शशि कोन्हेर द्वारा)
बिलासपुर।चार दिन पहले अवैध रेत परिवहन में लगे हाईवा से दबकर लोफंदी गांव में हुई एक युवक (सलमान वल्द जब्बार) की मौत के बाद बिलासपुर के सहायक खनिज अधिकारी (अनिल कुमार साहू) जितनी मासूमियत से मीडिया और अखबारों में बयान देते दिखे उसे शर्मनाक ही कहा जाएगा। श्री अनिल कुमार साहू ने इस दुर्घटना के कारण सेंदरी,लोफंदी,कछार,घुटकू और कोनी में रेत के धन पिशाच सौदागरों का धतकरम उजागर होने के बाद जिस तरह से अपना दामन पाक-साफ बताने की कोशिश की है, वैसा कतई नहीं है। उनका यह कहना, जिला कलेक्टर की आंखों में धूल झोंकने जैसा है कि उन्हें इस क्षेत्र में, (अरपा नदी में एक) भी पोकलेन कभी खुदाई करते नहीं दिखा। दुर्घटना वाले दिन भी उन्होंने वहां एक भी पोकलैंड नहीं देखा। कोई भी अब बता सकता है कि नदी में किसी भी हाईवा में सिर्फ पोकलैंड अथवा एक्सीवेटर से ही रेत भरी जा सकती है। हाईवा में मैनुअल रेत की लोडिंग असंभव ही है। पूरा क्षेत्र जानता है कि कछार और लोफंदी व घुटकू के अवैध रेत घाटों से हर दिन कम से कम 1000 हाईवा रेत पोकलैंड के जरिए निकाली जा रही थी। जहां तक सहायक खनिज अधिकारी और उनके टीम की बात है। तो खनिज का अमला और उनके कारिंदे लगभग हर दिन इस क्षेत्र में आते जाते रहते हैं। लेकिन इसका खनिज विभाग के नियम कायदों का परिपालन कराने से कोई मतलब नहीं होता। खनिज अमला यहां अवैध रकम की बंधी-बंधाई चंडी के लिए तकरीबन हर रोज चक्कर काटता रहा है। इसी क्षेत्र में रेत के अलावा ग्राम कछार से बहुत बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन की मिट्टी खोदकर सड़क निर्माण में लगे ठेकेदारों को बेची जा रही है।यह भी खनिज विभाग के अमले की पूरी जानकारी और देखरेख में हो रहा है। रहती मिट्टी के चोर इस काम को जितने धड़ल्ले से कर रहे हैं उसे देखकर कोई भी कह सकता है कि इसका भी हिस्सा खनिज विभाग में नीचे से ऊपर तक और इसी तरह थाने में निरंतर पहुंचने के कारण इन सभी ने अपने आंखों पर पट्टियां बांध रखी है। इतना ही नहीं वरन खनिज अधिकारी इस क्षेत्र में हो रही अवैध रेत और मिट्टी की खुदाई तथा बिक्री को लेकर अपने विभागीय उच्चाधिकारियों और कलेक्टर को भी गलत जानकारी देकर उनकी भी आंखों में वही, पट्टी बांधने की हरकत रहे हैं, जो उन्होंने अपनी आंखों पर बांध रखी है। कायदे से प्रदेश शासन और माइनिंग विभाग के ईमानदार अधिकारियों (अगर कुछ बचे हो) को इस मामले में पूरी गंभीरता से संज्ञान लेकर इस पूरे क्षेत्र में सहायक माइनिंग अधिकारी और उनके कारिन्दों की संदिग्ध भूमिका की जांच करनी चाहिए और उसके बाद अवैध रेत परिवहन के पूरे गोरखधंधे को चालाक और चतुर “इवेंट मैनेजर” की तरह संभाल और संचालन कर रहे अधिकारियों तथा उनके कारिंदों को एक ही झटके में बिलासपुर जिले की सीमा से बाहर कर देना चाहिए। ऐसा होने पर ही प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा दिया गया “अरपा बचाओ” का वह नारा सही साबित हो सकता है, जिसे उन्होंने “अरपा बचाओ पदयात्रा” के दौरान जोर शोर से सबके साथ मिलकर लगाया था।
