रायगढ़. कल हमने आपको समाचार के माध्यम से बताया था कि किस तरह अधिकारियों से सांठगांठ करके शहर के चारो तरफ अवैध प्लाटिंग व अवैध निर्माण के साथ-साथ अवैध कब्जे का लंबा कारोबार माफियाओं द्वारा चलाया जा रहा है। खुलेआम निर्माण कार्य होने की जानकारी मिलने के बाद भी निगम प्रशासन के बड़े अधिकारी इस ओर झांकते भी नही है। जबकि इमानदारी से अनुमति लेने वाले लोगों को निगम के चक्कर पे चक्कर लगाने पड़ते हैं उसके बाद भी अनुमति तो दूर बल्कि उसे टैक्स के जंजाल में फंसाकर घनचक्कर बना दिया जाता है।
जिस निर्माण को आप हमारी खबर के फोटो के रूप में देख रहे हैं वह शहर के हृदय स्थल कहलाये जाने वाले शहीद चैक का है जहां एक नही दो नही बल्कि आधा दर्जन से भी अधिक निर्माण कार्य का उदाहरण है वहां बन रहे व्यवसायिक दुकानों के नक्शे में न केवल भारी गड़बड़ी है बल्कि मनमाने निर्माण कार्य से शहर के सबसे व्यस्त सड़क पर भी अभी से जाम लगने लगा है। शहीद चैक के पावभाजी सेंटर से लेकर पूराना घाट की सड़क पर होनें वाले निर्माण कार्य बताते हैं कि यहां निगम के कथित सुरज की किरण का इतना असर है कि अवैध निर्माण पर आज तक कोई कार्रवाई नही हो रही है।
जानकारों की मानें तो यहां पहले राजस्व विभाग की मिलीभगत से जमीन की खरीदी बिक्री में भी बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी और इस गड़बड़ी में सबसे बड़ा लोचा यह था कि कभी भी इस इलाके में अपना कब्जा नही होनें के बावजूद भी एक डाक्टर को बेशकीमती जमीन कौडियों के भाव मिल गई। सूत्र बताते हैं कि शहीद चैक के पास बन रहे कथित क्लीनिक तथा आसपास के लोगों द्वारा नगर निगम से निर्माण कार्य के लिये जो अनुमति लिया जाना बताया जाता है उसके ठीक विपरीत नक्शे के अनुरूप निर्माण कार्य दिन व रात जारी है।
शहीद चैक से कलेक्टेªट मार्ग, चक्रधर नगर मार्ग निकलता है और यहां केलो पुल पर बढ़ते टैªफिक से कई बार जनता को जाम की स्थिति का सामना करना पडता है और इस सड़क के किनारे धड़ल्ले से हो रहे निर्माण कार्य में नियमों की धज्जियां उड़ने के बावजूद कोई कार्रवाई नही होना संदेह को जन्म देता है। चूंकि निगम का सूरज इस तरफ शायद निकलता ही नही, जिसका प्रमाण यह है कि यहां सड़क पर पड़ा मलबा निर्माण सामग्री, के साथ-साथ अवैध निर्माण निगम के अधिकारियों को ठेंगा दिखा रहा है और जनता को यह मलाल है कि इतनी ईमानदारी से काम अगर उनका भी हो जाता तो निगम का खजाना टैक्स से भर जाता। लेकिन अधिकारी है कि उनकी नींद टूटती ही नही है।
बहरहाल शहीद चैक के आसपास बढ़ते निर्माण कार्य निगम को लाखों की चपत लगा चुके हैं और यहां तेजी से बनने वाले व्यवसायिक काम्पलेक्स से सड़क भी सिकूड़ती जा रही है। कथित नक्शे में पार्किंग भी शायद बाद में खोजनी पड़े।
रजिस्ट्री विभाग ने कैसे कर दी रजिस्ट्री
चर्चा में यह बात भी है कि जिला कलेक्टेªड में मिलीभगत का ऐसा नजारा रजिस्ट्री विभाग में रोजाना देखने को मिलता है जहां जमीनों की रजिस्ट्री पर निर्धारित कमीशन मिलने के बाद साहब के हस्ताक्षर होते हैं और यहां कहीं भी कमीशन की कमी या देने वाला कोताही बरतता है तो उसकी रजिस्ट्री शायद ही हो पाये, अगर हो भी गई तो निरस्त होनें में समय नही लगता। अधिकारिक सूत्र बताते हैं कि रजिस्ट्री कार्यालय में रजिस्ट्री करने वाले साहब व्यवसायिक व घर या नई जमीन मामले में कभी भी मौके पर नही जाते जो बता दिया जाता है उस पर शील ठप्पा कमीशन के आधार पर लग जाता है। नियमों मंे यह है कि अगर किसी भी जमीन की रजिस्ट्री खरीदी बिक्री के आधार पर करवाई जाती है तो उसका आंकलन जगह के हिसाब से होता है लेकिन साहब उन जगह पर शायद ही कभी जाते हैं। शहीद चैक में भी ऐसा खेल हो चुका है और इसके अलावा साहब की कृपा दृष्टि की कमी होती है तो आपका काम शायद कभी न हो।
