रायगढ़। रायगढ़ जिले का एक बड़ा हिस्सा वनांचल क्षेत्र माना जाता है जिले के 5 से 6 विकासखण्डों में घने जंगल हैं। जहां हाथियों के अतिरिक्त अन्य वन्य जीव भी रहते हैं। पिछले कुछ वर्षो के दौरान बेतहाशा जंगल कटने से गजराजों सहित इन वन्य जीवों के रहवास के साथ-साथ भोजन का संकट भी खड़ा हुआ है जिसके चलते हाथी अब भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर रूख करने लगे हैं। जिसके चलते कई बार हाथियों सहित लोगों के जान माल का नुकसान होता रहा है।
जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित बंगुरसिया क्षेत्र भी हाथी प्रभावित इलाका है। जहां आए दिन हाथियों की आमद देखी जाती है। इससे कई बार लोगों का सामना भी हो चुका है। इसके बावजूद बंगरसिया स्थित धान उपार्जन केंद्र में हाथियों से धान की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। समिति के लोग रात में हाथियों के डर से समिति के छत पर सोते हैं लेकिन इस पर प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं जा रहा। इस समिति में घुसकर के बार हाथी धान को खा चुके हैं।
धान हाथियों का प्रिय भोजन माना जाता है। धान खाने के लिए हाथी कहीं भी पहुंच जाते हैं। धान के फसल के समय हाथियों की रिहायशी इलाकों में घुसपैठ अधिक हो जाती है। वहीं इसके साथ ही इन दिनों बंगुरसिया क्षेत्र में भी करीब 2 दर्जन से अधिक हाथियों के होने की सूचना है। ऐसे में धान खरीदी केंद्र पर हर समय जंगली हाथियों का खतरा मंडराता रहता है। हाथियों का खौफ ऐसा है कि सुरक्षाकर्मी खरीदी केंद्र की छत के ऊपर सो रहे हैं। इतने खतरों के बावजूद भी धान खरीदी केंद्र पर हाथी को भगाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। हाथियों को आग जलाकर भगाने की बात कही जा रही है। लेकिन इलाका जंगल के बीचो-बीच है। ऐसे में हाथी कभी भी आ सकते हैं। खरीदी केंद्र पर करीब 8000 क्विंटल धान खुले में रखा हुआ है। जिसकी सुरक्षा को लेकर प्रशासन लापरवाही बरत रहा है। वहीं धान खरीदी केंद्र पर कार्यरत कर्मचारियों का जीवन भी हर समय खतरे के साए में है।
धान खरीदी केंद्र पर 18 गांव के 480 किसानों ने अपना पंजीयन करवाया है। अब तक इनमेंं से केवल 200 किसानों ने ही अपना धान बेचा है। जबकि 280 किसानों का धान अब तक खरीदी केंद्र में पहुंचा नहीं है। खरीदी केंद्र की क्षमता 4000 क्विंटल की है। लेकिन उठाव नहीं होने के कारण वर्तमान में यहां 8000 क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे असुरक्षित पड़ा हुआ है। हालांकि इस मौसम में बारिश की संभावना कम होती है। लेकिन इस धान पर हर वक्त हाथियों का खतरा मंडरा रहा है। साथ ही यहां के कर्मचारी भी खौफ के साए में जीने पर मजबूर है। लेकिन प्रशासन की ओर से उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
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