दुनियाभर के देशों की नजरें तकरीबन हर समय नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन पर लगी रहती हैं, ताकि वह कुछ ऐसी हरकत न कर दे, जिसका असर पूरे विश्व पर पड़े। उसके तानाशाही रवैये की ही वजह से नॉर्थ कोरिया पर विभिन्न तरीके के प्रतिबंध भी लगाए जा चुके हैं, लेकिन किम जोंग उन सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के एक्सपर्ट्स ने कहा है कि नॉर्थ कोरिया बैन को दरकिनार कर अपने परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों को आधुनिक बनाने में लगा हुआ है। इसके साथ ही, वह दूसरे देशों से इन कार्यक्रमों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक को ले रहा है। नॉर्थ कोरिया पर लगाए गए संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों पर निगरानी रखने वाले एक्सपर्ट्स के एक दल ने सोमवार को सिक्योरिटी काउंसिल में भेजी गई एक रिपोर्ट में बताया है कि किम जोंग उन की सरकार ने ऐसी सामग्री का निर्माण भी कर लिया है जिससे परमाणु हथियार बनाया जा सकता है।
सैन्य परेड में नॉर्थ कोरिया ने दिखाया ‘दम’
अपनी रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स का कहना है कि नॉर्थ कोरिया ने कम दूरी की नई मिसाइलों, मध्यम दूरी की पनडुब्बी से मार करने लायक और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों का सैन्य परेड में प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा, ”उसने (नॉर्थ कोरिया) नए बैलिस्टिक मिसाइल मुखास्त्र और रणनीतिक परमाणु हथियारों के विकास के परीक्षण तथा निर्माण की घोषणा की और बैलिस्टिक मिसाइल को नया बनाया।” बता दें कि नॉर्थ कोरिया ने साल 2006 में पहली बार परमाणु परीक्षण किया था, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने उस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। संयुक्त राष्ट्र ने प्योंग यांग द्वारा परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन रोकने के लिए देश के ज्यादातर एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगा दी है और आयात को बहुत हद तक सीमित कर दिया है।
बैन को नजरअंदाज कर रहा नॉर्थ कोरिया
एसोसिएटेड प्रेस को मिली रिपोर्ट की समरी में साफ तरीके से लिखा है कि नॉर्थ कोरिया प्रतिबंधों को नजरअंदाज करते हुए अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों का विकास कर रहा है, अवैध रूप से तेल का इम्पोर्ट कर रहा है, अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग चैनलों का इस्तेमाल कर रहा है और आपराधिक साइबर गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन का हथियारघर 2017 के बाद अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगियों के लिए एक बड़े खतरे के रूप में उभरा है। उस परीक्षण में थर्मोन्यूक्लियर वॉरहेड का विस्फोट और आईसीबीएम के परीक्षण शामिल थे, जिन्होंने अमेरिकी क्षेत्र तक पहुंचने की क्षमता का प्रदर्शन किया था। वहीं, एक साल बाद, किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ कूटनीति की शुरुआत की, लेकिन वह भी साल 2019 आते-आते पटरी से उतर गया। उस समय अमेरिका ने नॉर्थ कोरिया द्वारा एक प्रमुख सौदे के बदले में प्रतिबंधों की राहत की मांगों को खारिज कर दिया था।
